Knews Desk – पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) की ऐतिहासिक पहचान से जुड़े 120 साल से अधिक पुराने जनरल अस्पताल भवन को अब गिराया जा रहा है. सोमवार को इस पुरानी इमारत के हथवा वार्ड को ध्वस्त करने का काम शुरू कर दिया गया. कभी बांकीपुर जनरल अस्पताल के नाम से पहचानी जाने वाली इस इमारत का इतिहास पटना की चिकित्सा व्यवस्था और मेडिकल शिक्षा के विकास से गहराई से जुड़ा रहा है. खास बात यह है कि महात्मा गांधी ने मई 1947 में इस अस्पताल का दौरा भी किया था.
जनरल अस्पताल भवन को बचाने के लिए पीएमसीएच के पूर्व छात्र, डॉक्टर, गांधीवादी और विरासत संरक्षण से जुड़े लोग लंबे समय से आवाज उठाते रहे हैं. पीएमसीएच एलुमनाई एसोसिएशन की ओर से भी बिहार सरकार से अपील की गई थी कि अस्पताल के आधुनिकीकरण के साथ-साथ ऐतिहासिक इमारतों को भी संरक्षित किया जाए.
विरासत प्रेमियों का तर्क था कि ये भवन केवल ईंट-पत्थर की संरचनाएं नहीं हैं, बल्कि पीएमसीएच से जुड़े डॉक्टरों, छात्रों और मरीजों की वर्षों पुरानी यादों का हिस्सा हैं. हालांकि, पुनर्विकास योजना के तहत पुराने भवनों को हटाने की प्रक्रिया अब आगे बढ़ रही है.
पुराना जनरल अस्पताल भवन करीब 1904 में बांकीपुर जनरल अस्पताल के तौर पर बनाया गया था. बाद में यह मेडिकल स्कूल और फिर मेडिकल कॉलेज से जुड़ गया. समय के साथ इसका नाम पटना जनरल अस्पताल हुआ और बाद में यह पीएमसीएच परिसर का हिस्सा बन गया.
दो मंजिला इस इमारत में ब्रिटिश दौर की लिफ्ट भी मौजूद थी. भवन के उत्तरी हिस्से में हथवा वार्ड और दक्षिणी हिस्से में गुजरी वार्ड था. इसके अलावा दोनों मंजिलों पर मरीजों के इलाज के लिए कई अन्य वार्ड भी संचालित होते थे.
पीएमसीएच का इतिहास भी 100 साल से ज्यादा पुराना
पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का मौजूदा स्वरूप 1925 में सामने आया, जब इसे तत्कालीन बिहार और उड़ीसा के पहले मेडिकल कॉलेज के रूप में स्थापित किया गया. उस समय संस्थान का नाम प्रिंस ऑफ वेल्स मेडिकल कॉलेज रखा गया था.
दिसंबर 1921 में ब्रिटेन के तत्कालीन प्रिंस ऑफ वेल्स पटना आए थे, जो बाद में ब्रिटेन के राजा एडवर्ड अष्टम बने. उनकी यात्रा की याद में मेडिकल कॉलेज का नाम रखा गया था. आजादी के बाद संस्थान का नाम बदलकर पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल कर दिया गया.
हालांकि, इसकी जड़ें 1874 में स्थापित टेंपल मेडिकल स्कूल तक जाती हैं. पुराने जनरल अस्पताल ने चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के इस लंबे सफर में अहम भूमिका निभाई.
ओल्ड बॉयज हॉस्टल भी हो चुका है ध्वस्त
पुराने जनरल अस्पताल भवन से पहले पीएमसीएच का लगभग 100 साल पुराना ओल्ड बॉयज हॉस्टल भी पुनर्विकास परियोजना के तहत गिराया जा चुका है. यह हॉस्टल जनरल अस्पताल भवन के सामने स्थित था.
हॉस्टल के टूटने के बाद देश-विदेश में रह रहे पीएमसीएच के पूर्व छात्रों ने अपनी पुरानी यादें साझा करते हुए निराशा जताई थी. भारत के अलावा ब्रिटेन और अमेरिका में रहने वाले कई पूर्व छात्र भी इस इमारत के संरक्षण की मांग कर चुके थे. पीएमसीएच की 101वीं वर्षगांठ का कार्यक्रम भी इसी पुराने छात्रावास परिसर में आयोजित किया गया था, जिसके करीब दो महीने बाद इसे ध्वस्त कर दिया गया.
पुराने जनरल अस्पताल भवन को गिराने की तैयारियां कई महीनों से चल रही थीं. ध्वस्तीकरण से पहले इमारत के पुराने दरवाजे और खिड़कियां निकाल ली गई थीं. इसके बाद सोमवार से हथवा वार्ड को मशीनों की मदद से गिराने का काम शुरू हुआ.
पीएमसीएच के ज्यादातर पुराने वार्ड और अधीक्षक कार्यालय को नई इमारतों में स्थानांतरित किया जा चुका है. पिछले दो वर्षों में परिसर में तैयार हुई नई इमारतों का चरणबद्ध तरीके से उद्घाटन भी किया गया है.
पीएमसीएच को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए बड़े स्तर पर पुनर्विकास परियोजना चल रही है. इसकी आधारशिला बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 8 फरवरी 2021 को रखी थी.
करीब 5,540 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के तहत 5,462 बेड की क्षमता वाला आधुनिक अस्पताल परिसर तैयार किया जा रहा है. योजना को लगभग सात वर्षों में चरणबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. परियोजना के तहत अस्पताल परिसर में आधुनिक और ऊंची इमारतों का निर्माण किया जा रहा है.
आधुनिकीकरण के बीच इतिहास खोने की चिंता
पीएमसीएच के आधुनिकीकरण के साथ जहां मरीजों को बेहतर और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं मिलने की उम्मीद है, वहीं परिसर की ऐतिहासिक इमारतों के खत्म होने को लेकर चिंता भी बढ़ रही है.
पूर्व छात्रों, डॉक्टरों और विरासत संरक्षण से जुड़े लोगों का कहना है कि आधुनिक अस्पताल की जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन संस्थान के इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण संरचनाओं को संरक्षित करने का विकल्प भी तलाशा जाना चाहिए था.
गांधीवादी संगठनों और विरासत प्रेमियों की ओर से भी पुराने जनरल अस्पताल भवन समेत अन्य ऐतिहासिक संरचनाओं को बचाने की मांग उठती रही. लेकिन इन अपीलों के बावजूद अब 120 साल से ज्यादा पुरानी यह इमारत भी पीएमसीएच के पुनर्विकास की राह में इतिहास का हिस्सा बनने जा रही है.