‘बस बहुत हो गया…’, अभिषेक बनर्जी के खिलाफ लगातार FIR पर कलकत्ता हाईकोर्ट नाराज

KNEWS DESK – तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ लगातार दर्ज हो रही आपराधिक शिकायतों को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को नाराजगी जताई. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा, “बस बहुत हो गया.” साथ ही संकेत दिया कि अगर इसी तरह शिकायतें और FIR दर्ज होती रहीं तो भविष्य में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ नई FIR दर्ज करने से पहले अदालत की अनुमति लेना जरूरी किया जा सकता है.

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि अभिषेक बनर्जी को पहले से अंतरिम सुरक्षा मिली हुई है, इसके बावजूद उनके खिलाफ कई आपराधिक शिकायतें दर्ज की जा रही हैं.

30 नवंबर तक दंडात्मक कार्रवाई पर रोक

कोर्ट ने फिलहाल अभिषेक बनर्जी को राहत देते हुए 30 नवंबर तक उनके खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है. हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस मामले की जांच जारी रख सकती है.

कोर्ट ने कहा कि जांच करने और आरोप पत्र दाखिल करने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन मौजूदा स्थिति में बनर्जी से हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं दिखाई देती.

शिकायत से अभिषेक का संबंध क्या?

सुनवाई के दौरान कोर्ट एक ऐसी FIR से जुड़े मामले पर विचार कर रहा था, जो क्लिनिकल प्रैक्टिस और कथित नकली दवाओं से जुड़ी गड़बड़ियों की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी.

अभिषेक बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने पक्ष रखा. अदालत ने शिकायत की प्रकृति पर सवाल उठाते हुए पूछा कि बिना जांच के अभिषेक बनर्जी को इन आरोपों से कैसे जोड़ा जा सकता है.

कोर्ट ने कहा कि जब तक जांच से कोई सीधा संबंध सामने नहीं आता, तब तक यह कैसे माना जा सकता है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों का अभिषेक बनर्जी से संबंध है.

‘मैंने तीन शिकायतें व्यक्तिगत रूप से देखीं’

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि उसने व्यक्तिगत रूप से तीन शिकायतों को देखा है और इनमें से किसी का भी अभिषेक बनर्जी से सीधा संबंध नजर नहीं आया.

राज्य की ओर से दलील दी गई कि कथित अपराध सीधे अभिषेक बनर्जी ने भले ही न किए हों, लेकिन जांच के दौरान उनके अधीनस्थों के माध्यम से उनसे संबंध सामने आ सकता है.

इस पर कोर्ट ने कहा कि पुलिस अपनी जांच जारी रख सकती है, लेकिन इस स्तर पर हिरासत में पूछताछ या किसी दंडात्मक कार्रवाई की जरूरत नहीं है.

सुनवाई के दौरान अदालत ने शिकायतकर्ता की पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया. कोर्ट ने कहा कि शिकायत दर्ज कराने वाला व्यक्ति अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ चुका है और दो बार उनसे हार चुका है.

राज्य सरकार ने हालांकि कहा कि शिकायतकर्ता का चुनावी इतिहास जांच के लिए अप्रासंगिक नहीं है और आरोपों की जांच के दौरान अन्य लोगों के जरिए अभिषेक बनर्जी से संभावित संबंध सामने आ सकता है.

भविष्य में FIR से पहले कोर्ट की अनुमति?

लगातार शिकायतों और FIR पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने संकेत दिया कि अगर इसी तरह अभिषेक बनर्जी के खिलाफ मामले दर्ज होते रहे तो भविष्य में नई FIR दर्ज करने से पहले अदालत की अनुमति लेने की व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है.

फिलहाल अदालत ने पुलिस को जांच जारी रखने की अनुमति दी है, लेकिन 30 नवंबर तक अभिषेक बनर्जी के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है. अब इस मामले में आगे की सुनवाई और अदालत के अगले निर्देश पर नजर रहेगी.

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