Aja Ekadashi Parana 2026: 8 सितंबर को इस समय खोलें अजा एकादशी का व्रत, जानें सही विधि

KNEWS DESK- भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी के नाम से जाना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और पापों से मुक्ति पाने के लिए किया जाता है. इस दिन भक्त भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं और पूरे दिन उपवास रखकर हरि नाम का स्मरण करते हैं.

अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जा रहा है. एकादशी व्रत में जितना महत्व उपवास और पूजा का है, उतना ही महत्वपूर्ण सही समय पर व्रत का पारण करना भी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पारण द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद करना चाहिए.

8 सितंबर को इतने समय के बीच होगा पारण

अजा एकादशी व्रत का पारण 8 सितंबर 2026 को सुबह 5 बजकर 53 मिनट से सुबह 10 बजकर 04 मिनट के बीच किया जा सकता है. वहीं, पारण के लिए एक अन्य शुभ समय सुबह 7 बजकर 17 मिनट से 9 बजकर 53 मिनट तक बताया गया है. व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अपनी सुविधा के अनुसार निर्धारित समय सीमा में पारण करने का प्रयास करना चाहिए.

कब शुरू और कब समाप्त हुई एकादशी तिथि?

अजा एकादशी की तिथि 6 सितंबर 2026 को शाम 7 बजकर 29 मिनट से शुरू हुई और 7 सितंबर को शाम 5 बजकर 03 मिनट पर समाप्त होगी. इसके बाद द्वादशी तिथि में व्रत का पारण किया जाएगा. एकादशी व्रत को सूर्योदय से पहले या रात में खोलने की परंपरा नहीं है.

अजा एकादशी का पारण कैसे करें?

8 सितंबर की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. इसके बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु की पूजा करें और घी का दीपक जलाएं.

भगवान विष्णु को फल, सात्विक भोजन और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें. पूजा के दौरान तुलसी दल चढ़ाना भी शुभ माना जाता है. इसके बाद भगवान को भोग लगाकर उनका प्रसाद ग्रहण करें और इसी के साथ व्रत का पारण करें.

पारण के दौरान सात्विक भोजन करना चाहिए. अपनी क्षमता के अनुसार किसी जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजन, अनाज या दक्षिणा का दान करना भी शुभ माना जाता है.

पारण में क्या खाएं?

एकादशी के उपवास के बाद व्रत खोलते समय हल्का और सात्विक भोजन करना बेहतर माना जाता है. फल, प्रसाद और सात्विक आहार से पारण किया जा सकता है. धार्मिक परंपरा में द्वादशी के दिन चावल का सेवन करके व्रत खोलने की भी मान्यता है. हालांकि, अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में पारण की विधि अलग हो सकती है.

अजा एकादशी का धार्मिक महत्व

अजा एकादशी को भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष माना जाता है. मान्यता है कि श्रद्धा के साथ इस व्रत को रखने और इसकी कथा सुनने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन के कष्ट दूर होने की कामना की जाती है. पौराणिक कथा में राजा हरिश्चंद्र का भी उल्लेख मिलता है. कहा जाता है कि अजा एकादशी के व्रत के प्रभाव से उन्हें कठिन परिस्थितियों से मुक्ति मिली और उनका खोया हुआ राज्य तथा परिवार वापस प्राप्त हुआ.

एकादशी के दिन इन कामों से बचें

अजा एकादशी के दिन चावल का सेवन न करने की धार्मिक मान्यता है. इसके अलावा मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन और अन्य तामसिक खाद्य पदार्थों से दूर रहने की सलाह दी जाती है. एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने से भी बचना चाहिए. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु का स्मरण, भजन-कीर्तन और पूजा-पाठ करना शुभ होता है. इसके अलावा बाल, दाढ़ी और नाखून काटने से भी इस दिन बचने की परंपरा है. दिन के समय सोने के बजाय भगवान की भक्ति और धार्मिक कार्यों में समय बिताने को अधिक शुभ माना जाता है.

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