नेपाल में बाढ़ का कहर: 288 भारतीयों से संपर्क टूटा, 21 का रेस्क्यू; 200 तिब्बत में फंसे

KNEWS DESK- नेपाल-चीन सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारतीय नागरिकों को लेकर चिंता बढ़ गई है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि 288 भारतीय नागरिकों से फिलहाल संपर्क नहीं हो पा रहा है, जबकि करीब 200 भारतीयों ने चीन के तिब्बत क्षेत्र में मदद मांगी है। अब तक 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। भारत सरकार नेपाली अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और राहत-बचाव अभियान में सहयोग कर रही है।

288 भारतीयों से नहीं हो पा रहा संपर्क

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को नेपाल में बाढ़ के बाद भारतीय नागरिकों की स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रभावित लोगों का पता लगाने के लिए भारत नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नेपाल के प्रधानमंत्री से बातचीत कर आपदा पर संवेदना जताई और भारत की ओर से हरसंभव मानवीय सहायता की पेशकश की।

MEA के मुताबिक, संपर्क से बाहर 288 भारतीयों में अलग-अलग समूहों के लोग शामिल हैं। इनमें त्रिशूली-1 पावर प्रोजेक्ट पर काम करने वाले 73 लोग, तमिलनाडु के 37 लोग और 49 लोगों के दो अन्य समूह शामिल हैं।

कई राज्यों के लोग प्रभावित

विदेश मंत्रालय के अनुसार पश्चिम बंगाल के 32 नागरिकों का एक समूह भी संपर्क से बाहर है। इसके अलावा अलग-अलग राज्यों के 61 भारतीयों और केरल के 33 नागरिकों के एक समूह से भी संपर्क नहीं हो पाया है। ये लोग अलग-अलग ट्रैवल एजेंसियों के जरिए नेपाल पहुंचे थे।

वहीं, ईशा फाउंडेशन से जुड़े लोगों के भी प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। बाढ़ के कारण कई इलाकों में मोबाइल नेटवर्क, सड़क और संचार व्यवस्था बाधित होने से लोगों से संपर्क करना मुश्किल हो रहा है।

21 भारतीयों का किया गया रेस्क्यू

विदेश मंत्रालय ने बताया कि अब तक 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इसके अलावा करीब 200 भारतीय नागरिकों ने सीमा के चीनी हिस्से यानी तिब्बत में मदद मांगी है। भारत सरकार वहां मौजूद भारतीयों की स्थिति को लेकर भी संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है।

नेपाल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भारत की ओर से राहत सामग्री भी भेजी गई है। राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।

नेपाल में मौतों का आंकड़ा बढ़ा

इस बीच नेपाल में आई भीषण बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 270 बताई गई है। नेपाल पुलिस के अनुसार, बाढ़ के बाद अलग-अलग जिलों से 93 और शव बरामद किए गए, जिसके बाद मृतकों का आंकड़ा बढ़ गया। प्रभावित क्षेत्रों से 800 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

पुलिस के मुताबिक चितवन, नवलपरासी पूर्व, धादिंग, गोरखा, रसुवा, नवलपरासी पश्चिम और नुवाकोट समेत कई जिले बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

भूस्खलन के बाद आया अचानक सैलाब

शुरुआती जानकारी के अनुसार, भूस्खलन के कारण भोटेकोशी नदी की सहायक नदी ल्हेंदे का बहाव बाधित हुआ। पानी जमा होने के बाद अचानक तेज बहाव के साथ बाढ़ नीचे की ओर आई। सबसे पहले चीन सीमा के पास रसुवागढ़ी के तिमुरे इलाके में इसका असर देखा गया। इसके बाद कई इलाकों में पानी और मलबे ने भारी तबाही मचाई।

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भी बताया है कि लापता लोगों में करीब 300 भारतीय पर्यटक शामिल हैं। फिलहाल राहत एजेंसियों की प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश और फंसे नागरिकों को सुरक्षित निकालना है।

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