Knews Desk- पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी की पंजाब यूनिवर्सिटी में एमए पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की परीक्षा से जुड़ी तस्वीरें सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया है। परीक्षा हॉल के अंदर चन्नी की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने पर विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
चंडीगढ़ के पूर्व मेयर और पंजाब यूनिवर्सिटी के पूर्व सीनेटर देवेश मोदगिल ने इस मामले में जांच की मांग की है। उन्होंने विश्वविद्यालय के चांसलर, कुलपति और अन्य संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर पूछा है कि जब परीक्षा केंद्र के अंदर मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं है, तो परीक्षा के दौरान तस्वीरें कैसे खींची गईं।
मोदगिल ने 20 अगस्त को आयोजित परीक्षा की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि क्या चन्नी को परीक्षा में बैठने के लिए कोई विशेष अनुमति दी गई थी। नियमों का उल्लंघन सामने आने पर उन्होंने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
क्या है पूरा मामला
चरणजीत सिंह चन्नी ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में शामिल होने के बजाय पंजाब यूनिवर्सिटी की अपनी एमए परीक्षा को प्राथमिकता दी थी। परीक्षा के बाद केंद्र के अंदर की कुछ तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। इनमें चन्नी परीक्षा देते हुए नजर आए।
परीक्षा केंद्रों में आमतौर पर मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने पर रोक होती है। साथ ही परीक्षा के दौरान फोटो या वीडियो बनाने की भी अनुमति नहीं होती। ऐसे में परीक्षा हॉल के अंदर से तस्वीरें सामने आने के बाद सवाल खड़े हो गए हैं कि आखिर ये तस्वीरें किसने और किस तरह खींचीं।
चन्नी ने दी सफाई
विवाद के बीच चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि उस दिन मीडिया उनके पीछे चल रहा था, क्योंकि उन्होंने कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में हिस्सा नहीं लिया था। उनके मुताबिक, मीडिया से जुड़े कुछ लोगों ने ही परीक्षा के दौरान उनकी तस्वीरें खींची थीं और बाद में उन्हें सार्वजनिक कर दिया।
चन्नी ने कहा कि वह पंजाब यूनिवर्सिटी से 20 से अधिक परीक्षाएं दे चुके हैं और उन्होंने कभी खुद परीक्षा देते हुए तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं कीं। उनका कहना है कि अगर मीडिया ने उनकी तस्वीरें खींची हैं तो इसे इतना बड़ा विवाद बनाने की जरूरत नहीं है।
चन्नी इससे पहले पंजाब यूनिवर्सिटी से राजनीतिक शास्त्र में पीएचडी भी कर चुके हैं। अब वह पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एमए की परीक्षा दे रहे हैं।
राज्यपाल से भी मिले पूर्व सीनेटर
मामले को लेकर देवेश मोदगिल ने पंजाब के राज्यपाल से भी मुलाकात की है। उन्होंने परीक्षा केंद्र में नियमों के कथित उल्लंघन की निष्पक्ष जांच की मांग की। राज्यपाल की ओर से मामले की जांच का भरोसा दिए जाने की बात सामने आई है।
फिलहाल पंजाब यूनिवर्सिटी की ओर से इस पूरे विवाद पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि परीक्षा केंद्र के अंदर तस्वीरें किस तरह ली गईं और क्या परीक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ था।