स्वाइन फ्लू है या सामान्य वायरल फीवर? इन लक्षणों से समझें फर्क, एक्सपर्ट की सलाह

KNEWS DESK- बुखार, खांसी, सिरदर्द और बदन दर्द जैसे लक्षण स्वाइन फ्लू और सामान्य वायरल इंफेक्शन दोनों में दिखाई दे सकते हैं। ऐसे में सिर्फ लक्षणों के आधार पर एच1एन1 की पुष्टि करना मुश्किल है। जानिए किन संकेतों पर सावधान होने की जरूरत है और कब डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

मौसम बदलने के साथ बुखार, खांसी, गले में खराश और सर्दी-जुकाम की समस्या आम हो जाती है। लेकिन जब तेज बुखार के साथ शरीर में दर्द और बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस हो, तो कई लोगों को चिंता होने लगती है कि कहीं यह स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 इंफ्लूएंजा तो नहीं। दरअसल, इन्फ्लूएंजा और सामान्य सर्दी-जुकाम के लक्षण कई बार एक जैसे होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इन्फ्लूएंजा में अचानक बुखार, सूखी खांसी, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, अत्यधिक थकान, गले में खराश और नाक बहना जैसे लक्षण हो सकते हैं।

स्वाइन फ्लू और वायरल फीवर में फर्क कैसे करें?

सिर्फ बुखार की तीव्रता देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि संक्रमण एच1एन1 है या सामान्य वायरल। फ्लू में लक्षण अक्सर अचानक शुरू होते हैं और बुखार के साथ बदन दर्द, सिरदर्द और काफी ज्यादा कमजोरी महसूस हो सकती है।

इसके मुकाबले सामान्य सर्दी-जुकाम में छींक, नाक बहना, नाक बंद होना और गले में खराश जैसे लक्षण अधिक प्रमुख हो सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति में लक्षण एक जैसे नहीं होते और कई दूसरे वायरस भी फ्लू जैसे लक्षण पैदा कर सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर पक्की पहचान करना संभव नहीं है।

स्वाइन फ्लू या इन्फ्लूएंजा में दिख सकते हैं ये लक्षण

  • अचानक बुखार आना।
  • सूखी या लगातार खांसी होना।
  • सिरदर्द और शरीर में दर्द।
  • मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द।
  • काफी ज्यादा थकान और कमजोरी।
  • गले में खराश।
  • नाक बहना या नाक बंद होना।
  • कुछ मामलों में संक्रमण गंभीर होकर निमोनिया जैसी जटिलता पैदा कर सकता है।

सामान्य वायरल या सर्दी-जुकाम में क्या होता है?

सामान्य वायरल इंफेक्शन में भी बुखार, खांसी, गले में खराश और कमजोरी हो सकती है। कई बार लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं और छींक, नाक बहना या नाक बंद होना ज्यादा परेशान कर सकता है।

लेकिन यह समझना जरूरी है कि ‘वायरल फीवर’ कोई एक बीमारी नहीं है। अलग-अलग वायरस समान लक्षण पैदा कर सकते हैं। इसी वजह से सिर्फ लक्षण देखकर यह कहना कि संक्रमण सामान्य है या इन्फ्लूएंजा, हमेशा सही नहीं होता।

टेस्ट से कैसे होती है पुष्टि?

अगर डॉक्टर को इन्फ्लूएंजा का संदेह होता है, तो मरीज की स्थिति और जोखिम को देखते हुए फ्लू की जांच की सलाह दी जा सकती है। सांस से लिए गए सैंपल की लैब जांच के जरिए इन्फ्लूएंजा वायरस की पहचान की जा सकती है। आरटी-पीसीआर जैसे मॉलिक्यूलर टेस्ट से संक्रमण की पुष्टि की जा सकती है।

इसलिए तेज बुखार या खांसी होने पर खुद से यह मान लेना सही नहीं है कि यह एच1एन1 ही है। डॉक्टर लक्षण, बीमारी की गंभीरता और जरूरत पड़ने पर टेस्ट के आधार पर फैसला करते हैं।

किन लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?

इन्फ्लूएंजा का संक्रमण किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में गंभीर बीमारी का खतरा अधिक रहता है। इनमें छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और डायबिटीज, हृदय या फेफड़ों की बीमारी जैसी पुरानी स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोग शामिल हैं। कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में भी जटिलताओं का खतरा अधिक हो सकता है।

सांस फूलने लगे तो तुरंत लें मेडिकल मदद

अगर बुखार और खांसी के साथ सांस लेने में परेशानी, सांस फूलना, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी या तेजी से बिगड़ती हालत दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। गंभीर इन्फ्लूएंजा निमोनिया, सांस की गंभीर समस्या और अन्य जटिलताओं का कारण बन सकता है।

इलाज में खुद से एंटीबायोटिक न लें

ज्यादातर हल्के फ्लू के मामलों में आराम, पर्याप्त तरल पदार्थ और लक्षणों के अनुसार देखभाल की जरूरत होती है। गंभीर लक्षण वाले या हाई-रिस्क मरीजों के लिए डॉक्टर एंटीवायरल दवाओं पर विचार कर सकते हैं। एंटीबायोटिक दवाएं वायरस के खिलाफ काम नहीं करतीं, इसलिए इन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के लेना उचित नहीं है।

बचाव के लिए क्या करें?

इन्फ्लूएंजा से बचाव के लिए टीकाकरण सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। इसके अलावा बीमार होने पर घर पर आराम करना, खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकना, हाथों को नियमित रूप से धोना और संक्रमित व्यक्ति के बेहद करीब जाने से बचना भी जरूरी है।

हर तेज बुखार स्वाइन फ्लू नहीं होता और सामान्य वायरल इंफेक्शन के लक्षण भी कई बार फ्लू जैसे हो सकते हैं। इसलिए घबराने के बजाय लक्षणों पर नजर रखें। अगर हालत बिगड़ रही है, सांस लेने में परेशानी हो रही है या मरीज हाई-रिस्क ग्रुप में आता है, तो जल्द डॉक्टर से संपर्क करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *