KNEWS DESK- राजस्थान में सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर सामने आए आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। यू-डाइस 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 611 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनके पास अपनी खुद की इमारत नहीं है। वहीं, अपनी इमारत वाले 64,484 सरकारी स्कूलों में से 2,047 में छात्रों के लिए शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा 1,049 स्कूलों में पेयजल की व्यवस्था भी नहीं है।
राज्य सरकार सरकारी स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए अगले पांच वर्षों में करीब 12,500 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना पर काम कर रही है। इसमें नए स्कूल भवनों का निर्माण, पुरानी इमारतों की मरम्मत और जरूरी शैक्षिक सुविधाएं उपलब्ध कराने जैसे काम शामिल हैं।
611 स्कूलों के पास अपनी इमारत नहीं
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान में 611 स्कूल ऐसे हैं, जहां खुद की स्कूल बिल्डिंग उपलब्ध नहीं है। इनमें 10 बालिका विद्यालय भी शामिल हैं। इन स्कूलों में से बड़ी संख्या बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में बताई गई है। पश्चिमी राजस्थान के इन इलाकों में गर्मी के दौरान तापमान काफी बढ़ने के कारण स्कूलों के संचालन में भी मुश्किलें आती हैं।
सरकार का कहना है कि स्कूल भवनों की कमी दूर करने के लिए बजट में नए भवनों के निर्माण के लिए 450 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं, मौजूदा स्कूल भवनों की मरम्मत और जीर्णोद्धार के लिए 550 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
2,047 स्कूलों में टॉयलेट नहीं
यू-डाइस 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, अपनी इमारत वाले 64,484 सरकारी स्कूलों में 2,047 स्कूल ऐसे हैं, जहां बच्चों के लिए शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा 1,049 स्कूलों में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं होने की जानकारी सामने आई है।
स्कूलों में शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य से सीधे जुड़ा मुद्दा है। सरकार ने शौचालयों की सुविधा उपलब्ध कराना अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है।
पांच साल में 12,500 करोड़ खर्च करने की योजना
भजन लाल शर्मा सरकार ने सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए पांच साल में 12,500 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना तैयार की है। इसके तहत नए भवन बनाने के साथ पुराने स्कूलों की मरम्मत, जरूरी संसाधनों की उपलब्धता और अन्य आधारभूत सुविधाओं पर काम किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार करना है। हालांकि, मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के कई सरकारी स्कूल अभी भी भवन, शौचालय और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।
वहीं, पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर और जैसलमेर जैसे जिलों में स्कूल भवनों की कमी को दूर करना सरकार के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले वर्षों में प्रस्तावित बजट और योजनाओं के जरिए इन कमियों को दूर करने पर जोर दिया जाएगा।