KNEWS DESK- झारखंड में नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ हुई झड़प का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। गिरिडीह और हजारीबाग में हुई घटनाओं को लेकर पुलिस ने तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। इनमें 39 नामजद और 900 से अधिक अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है।
हजारीबाग में 21 अगस्त को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला फूंकने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में कोर्रा थाने में एफआईआर दर्ज की गई। इसमें 18 नामजद और करीब 700 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों से मारपीट भी हुई और आठ पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें चार उपनिरीक्षक शामिल हैं। फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस सीसीटीवी और वीडियो फुटेज के जरिए आरोपियों की पहचान कर रही है।
गिरिडीह में भी दो एफआईआर दर्ज की गई हैं। एक मामला एबीवीपी कार्यकर्ता की शिकायत पर दर्ज हुआ, जिसमें झामुमो जिलाध्यक्ष संजय सिंह समेत 11 लोगों को नामजद और 20 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया। दूसरी एफआईआर में करीब 10 नामजद और 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने यातायात बाधित किया, पुतला फूंकने की कोशिश की और पुलिस के साथ विवाद किया।
एफआईआर को लेकर छात्र संगठनों ने सरकार पर निशाना साधा है। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच के नेताओं का दावा है कि रांची और हजारीबाग की एफआईआर में कुछ लोगों के नाम एक साथ दर्ज हैं। उनका सवाल है कि एक ही समय में कोई व्यक्ति दो अलग-अलग जगहों पर कैसे मौजूद हो सकता है।
मामले पर बीजेपी भी सरकार पर हमलावर है। विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग की है। वहीं, एसएफआई की राष्ट्रीय संयुक्त सचिव आइशी घोष ने भी छात्रों पर कार्रवाई की आलोचना करते हुए सरकार से बातचीत के जरिए उनकी समस्याओं का समाधान करने की अपील की।
इस बीच झारखंड पुलिस ने प्रदर्शन, धरना, रैली और जनसभा के लिए पहले से अनुमति लेने की अपील की है। पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की भी सलाह दी है।