SIR पर चिदंबरम का ECI पर निशाना, बोले- नागरिक रह जाएंगे लेकिन वोट का अधिकार नहीं होगा

पूर्व राजदूत नवदीप सूरी के अनुभव का हवाला देते हुए कांग्रेस नेता ने चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल, करीब 10 करोड़ वयस्कों के वोटिंग अधिकार को लेकर जताई चिंता।

Knews Desk- कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम ने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के चलते देश में ऐसे नागरिकों की एक नई श्रेणी तैयार हो सकती है, जो नागरिक तो होंगे, लेकिन उनके पास मतदान का अधिकार नहीं होगा।

चिदंबरम ने यह टिप्पणी भारत के पूर्व राजदूत नवदीप सूरी के अनुभव के बाद की। सूरी ने पंजाब में चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान अपनी नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर चिंता जाहिर की थी।

पूर्व राजदूत नवदीप सूरी ने बताया कि तीन देशों में भारत का प्रतिनिधित्व करने के बावजूद उन्हें अपनी नागरिकता साबित करने में परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उनके जैसे व्यक्ति को इस प्रक्रिया में दिक्कत हो सकती है, तो आम नागरिकों के लिए स्थिति कितनी मुश्किल हो सकती है।

सूरी के मुताबिक, उनकी जानकारी 2003 की उस मतदाता सूची से मेल नहीं खा पाई, जिसका इस्तेमाल सत्यापन के लिए किया जा रहा था। उन्होंने बताया कि उस समय वह लंदन में तैनात थे और इसलिए उस अवधि में मतदाता सूची के अपडेट में उनका नाम शामिल नहीं हो सका था।

चिदंबरम ने 10 करोड़ लोगों को लेकर जताई चिंता

नवदीप सूरी के इसी अनुभव को आधार बनाते हुए पी. चिदंबरम ने चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद वयस्क आबादी का करीब 10 प्रतिशत हिस्सा ऐसा हो सकता है, जिसके पास नागरिकता तो होगी, लेकिन मतदान का अधिकार नहीं रहेगा।

चिदंबरम ने इसे चुनाव आयोग द्वारा ‘बिना वोट देने वाले नागरिकों’ की एक नई श्रेणी बनाए जाने के तौर पर पेश किया। उन्होंने SIR प्रक्रिया में दस्तावेजों के सत्यापन और मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने को लेकर पारदर्शिता तथा आम नागरिकों की परेशानियों पर सवाल उठाए।

2003 की वोटर लिस्ट बनी विवाद की वजह

इस पूरे विवाद में 2003 की मतदाता सूची अहम मुद्दा बन गई है। नवदीप सूरी का कहना है कि उस समय विदेश में तैनाती के कारण उनका नाम संबंधित सूची के अपडेट में दर्ज नहीं हो पाया था। ऐसे में उनका अनुभव इस बात की ओर इशारा करता है कि पुराने रिकॉर्ड से सत्यापन की प्रक्रिया में उन लोगों को परेशानी हो सकती है, जिनका नाम किसी कारण से उस समय की मतदाता सूची में दर्ज नहीं था।

SIR को लेकर विपक्ष लगातार चुनाव आयोग से प्रक्रिया, दस्तावेजों और मतदाता सूची से बाहर होने वाले लोगों के अधिकारों पर स्पष्टता की मांग कर रहा है।

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