KNEWS DESK-2029 लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं, लेकिन कांग्रेस के सामने संगठन से जुड़े कई सवाल बने हुए हैं। पार्टी बीजेपी को चुनौती देने की रणनीति पर काम कर रही है और राहुल गांधी युवाओं के बीच पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं, लेकिन संगठन में कई महत्वपूर्ण पद अब भी खाली हैं। ऐसे में पार्टी की चुनावी तैयारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा फिलहाल वायनाड से सांसद हैं, लेकिन उनके पास कोई आधिकारिक राज्य प्रभारी या अलग संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं है। पार्टी के अन्य महासचिवों को राज्यों का प्रभार दिया गया है, जबकि प्रियंका की भूमिका को लेकर अब तक स्पष्ट फैसला सामने नहीं आया है। महाराष्ट्र और असम में भी प्रभारी पद को लेकर स्थिति साफ नहीं है। महाराष्ट्र के प्रभारी रहे रमेश चेन्निथला केरल सरकार में मंत्री बन चुके हैं। उनके स्थान पर अभी तक पूर्णकालिक प्रभारी नियुक्त नहीं किया गया है। वहीं, असम के प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह ने विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन के बाद इस्तीफा दिया था। उनकी जगह भी अब तक नए प्रभारी की नियुक्ति नहीं हुई है।
पंजाब में कांग्रेस के सामने अंदरूनी मतभेद चुनौती बने हुए हैं। पार्टी ने राज्य के मुद्दों को सुलझाने के लिए समिति बनाई है, लेकिन नेताओं के बीच असहमति खत्म नहीं हुई है। चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत कुछ नेताओं की ओर से प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को हटाने की मांग उठाई गई है। इस पर आलाकमान की ओर से अंतिम फैसला अभी बाकी है। राजस्थान में भी प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा की भूमिका को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। यदि उन्हें कोई नई जिम्मेदारी दी जाती है, तो राजस्थान में नए प्रभारी की नियुक्ति करनी होगी। इसी तरह कांग्रेस के एससी विभाग का अध्यक्ष पद भी खाली है। विभाग के अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाए जाने के बाद इस पद पर नई नियुक्ति नहीं हुई है।
2029 के चुनाव में अभी समय है, लेकिन बड़े चुनाव के लिए बूथ स्तर से लेकर राज्य नेतृत्व तक मजबूत संगठन जरूरी होता है। कांग्रेस के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती लंबित संगठनात्मक फैसलों को पूरा करना, राज्यों में नेतृत्व को लेकर स्पष्टता लाना और अंदरूनी मतभेद दूर करना है। राहुल गांधी भले ही केंद्र सरकार के खिलाफ राजनीतिक अभियान तेज कर रहे हों, लेकिन इन संदेशों को चुनावी सफलता में बदलने के लिए मजबूत संगठन की जरूरत होगी। ऐसे में 2029 से पहले कांग्रेस को अपने संगठन की कमियों को दूर करना अहम होगा।