कर्नाटक में बिना रजिस्ट्रेशन वाले संगठनों पर शिकंजा, क्या RSS है निशाने पर?

Knews Desk- कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के एक नए प्रस्तावित बिल को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। सरकार ने बिना रजिस्ट्रेशन वाले संगठनों, संस्थाओं और समूहों द्वारा सरकारी परिसरों और सार्वजनिक संपत्तियों के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए ‘कर्नाटक सरकारी परिसर और सार्वजनिक संपत्ति के उपयोग का विनियमन विधेयक, 2026’ को मंजूरी दी है। इस फैसले के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या सरकार का निशाना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) है?

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे के मुताबिक, प्रस्तावित कानून का उद्देश्य सरकारी जमीन, इमारतों, पार्क, खेल मैदान, सड़क और दूसरी सार्वजनिक संपत्तियों के इस्तेमाल को नियमों के दायरे में लाना है। बिना जरूरी अनुमति के निजी व्यक्ति, संगठन, संघ या सोसायटी इन स्थानों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।

खरगे ने कहा कि यह कानून सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा और उनके जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए कानूनी व्यवस्था तैयार करेगा। सरकार का दावा है कि इसका मकसद किसी खास संगठन को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति के दुरुपयोग पर रोक लगाना है।

RSS को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?

बिल सामने आने के बाद RSS को लेकर चर्चा इसलिए तेज हुई है क्योंकि कर्नाटक में संघ की गतिविधियां पहले भी कांग्रेस सरकार के निशाने पर रही हैं। पिछले साल 19 अक्टूबर को प्रियांक खरगे के विधानसभा क्षेत्र चितपुर में प्रस्तावित RSS मार्च को कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए रोक दिया गया था।

प्रियांक खरगे लंबे समय से RSS की कानूनी स्थिति और उसके कामकाज को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में नए बिल को लेकर विपक्ष और RSS समर्थकों की ओर से आशंका जताई जा रही है कि इसका इस्तेमाल संघ जैसी संस्थाओं की गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है।

हालांकि, खरगे ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि बिल किसी एक संस्था, संगठन, क्लब, यूनियन या NGO को नियंत्रित करने के लिए नहीं लाया जा रहा है।

राहुल गांधी भी RSS पर हमलावर

RSS को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी लगातार निशाना साधते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने आरोप लगाया कि संघ का पुराना आधार छोटे भारतीय कारोबारी वर्ग से जुड़ा था, लेकिन अब बड़े उद्योगपतियों का प्रभाव उस पर बढ़ गया है।

वहीं, प्रियांक खरगे ने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के संदर्भ में RSS पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि RSS के नागपुर स्थित मुख्यालय पर लंबे समय तक राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया गया और वहां पहली बार आधिकारिक तौर पर 2002 में तिरंगा फहराया गया।

कुल मिलाकर, कर्नाटक सरकार के इस नए बिल ने कांग्रेस और RSS के बीच पहले से चल रहे राजनीतिक टकराव को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब सबकी नजर विधानसभा में बिल के पेश होने और उसके प्रावधानों पर रहेगी।

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