बाढ़ अनुमंडल के सिकंदरपुर पुल की हालत खराब, सड़क किनारे गहरे गड्ढे और पुल की दीवारों में दरारों से बढ़ा हादसे का खतरा
बिहार में एक और पुल की जर्जर हालत ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पटना के बाढ़ अनुमंडल क्षेत्र में स्थित सिकंदरपुर पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही के दौरान तेज कंपन महसूस किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है और समय रहते मरम्मत नहीं हुई तो बड़ा हादसा हो सकता है।
जानकारी के मुताबिक, बाढ़-हरनौत-दनियावां नेशनल हाईवे-30A के निर्माण के दौरान सिकंदरपुर पुल का भी निर्माण कराया गया था। करीब 600 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस हाईवे का निर्माण मोंटे कार्लो कंस्ट्रक्शन कंपनी ने किया था। हालांकि, निर्माण के कुछ ही वर्षों बाद पुल के आसपास की सड़क और ढलानों की स्थिति खराब होने लगी है।
सड़क किनारे बने गड्ढे बढ़ा रहे खतरा
बारिश के कारण पुल के दोनों ओर सड़क की ढलानों पर मिट्टी धंसने से बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। इन गड्ढों की गहराई इतनी अधिक है कि भारी वाहन भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, बारिश के दौरान इन गड्ढों के और धंसने का खतरा बना रहता है।
सिकंदरपुर पुल से NTPC की फ्लाई ऐश लेकर भारी ट्रक और हाइवा लगातार गुजरते हैं। इन वाहनों की आवाजाही के दौरान पुल के एक्सपेंशन जॉइंट्स में बदलाव और चौड़ापन दिखाई देने लगा है। पुल की साइड की दीवारों पर भी इसका असर नजर आ रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुल के निर्माण के कुछ वर्षों के भीतर ही इस तरह की स्थिति सामने आना निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पुल की दीवारों में आईं दरारें
पुल की साइड की दीवारों पर कई स्थानों पर दरारें दिखाई दे रही हैं। भारी ट्रकों के गुजरने पर पुल में जोरदार कंपन और झटके महसूस होते हैं। इस वजह से पैदल राहगीरों ने पुल से गुजरना तक कम कर दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल बनने के बाद शुरुआती पांच वर्षों तक इसके रखरखाव की जिम्मेदारी निर्माण कंपनी की है। इसके बावजूद पुल की मौजूदा स्थिति को लेकर अब तक प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।
चार साल पहले तैयार हुआ यह पुल अब बदहाल नजर आ रहा है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और निर्माण कंपनी से तत्काल पुल की तकनीकी जांच कराने, सड़क किनारे बने गड्ढों को भरने और क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत कराने की मांग की है, ताकि किसी संभावित बड़े हादसे को टाला जा सके।