KNEWS DESK- NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट में कथित साजिश को लेकर कई अहम दावे सामने आए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, परीक्षा से पहले ही कुछ सवाल छात्रों तक पहुंच गए थे। इसके लिए कथित तौर पर स्पेशल क्लास, WhatsApp-Telegram ग्रुप और बिचौलियों के नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया। CBI ने डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन और छात्रों की नोटबुक समेत कई सबूत जुटाने का दावा किया है।
चार्जशीट में कुछ विषय विशेषज्ञों, कोचिंग से जुड़े लोगों और बिचौलियों की कथित भूमिका का जिक्र किया गया है। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
परीक्षा से पहले ‘स्पेशल क्लास’ लगाने का आरोप
CBI के मुताबिक, केमिस्ट्री से जुड़े एक विषय विशेषज्ञ पीवी कुलकर्णी ने गोपनीयता संबंधी शर्तों के बावजूद परीक्षा से पहले पुणे में कथित तौर पर विशेष कक्षाएं आयोजित कीं। आरोप है कि इन कक्षाओं में छात्रों को कुछ ऐसे सवाल और उनके जवाब बताए गए, जिनके परीक्षा में आने का दावा बाद में किया गया।
जांच एजेंसी का कहना है कि मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल और एक ऐप से मिले रिकॉर्ड के जरिए छात्रों के संबंधित स्थान पर पहुंचने की जानकारी सामने आई। छात्रों की नोटबुक में मिले कुछ सवालों की भी जांच की गई। CBI ने आरोपी के मोबाइल फोन से प्रश्नों की तस्वीरें और छात्रों व अभिभावकों से हुई कथित बातचीत से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड मिलने का दावा किया है।
WhatsApp के जरिए सवाल भेजने का दावा
चार्जशीट में फिजिक्स के प्रश्नों को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। CBI के मुताबिक, एक विषय विशेषज्ञ पर पैसे लेकर परीक्षा से पहले सवाल साझा करने का आरोप है। जांच के दौरान मोबाइल में हाथ से लिखे कुछ प्रश्न मिलने का दावा किया गया है।
एजेंसी के अनुसार, कथित नेटवर्क में कुछ लोग छात्रों, अभिभावकों और विशेषज्ञों के बीच संपर्क का काम कर रहे थे। आरोप है कि छात्रों से लाखों रुपये तक लिए गए और उन्हें विशेष कक्षाओं में भेजा गया। कुछ प्रश्न WhatsApp के माध्यम से भी साझा किए जाने का दावा है। CBI ने बायोलॉजी से जुड़े प्रश्नों को लेकर भी इसी तरह की कथित व्यवस्था का जिक्र अपनी चार्जशीट में किया है।
‘NEET 2026’ और ‘FIFA World Cup 2026’ नाम से WhatsApp ग्रुप
CBI की जांच में कुछ WhatsApp ग्रुप भी सामने आने का दावा किया गया है। इनमें कथित तौर पर ‘NEET 2026’ और ‘FIFA World Cup 2026’ जैसे नामों का इस्तेमाल किया गया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन ग्रुपों के जरिए परीक्षा से जुड़ी जानकारी और कथित प्रश्न साझा किए गए। नेटवर्क में शामिल लोग पहचान छिपाने के लिए कोड वर्ड का इस्तेमाल भी करते थे।
CBI के अनुसार, NTA के प्रश्नपत्रों के मास्टर सेट के लिए भी कथित तौर पर अलग-अलग कोड नाम इस्तेमाल किए गए थे। एजेंसी इसे इस बात का संकेत मान रही है कि नेटवर्क के कुछ लोगों को परीक्षा की गोपनीय प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी थी।
सीकर के कोचिंग नेटवर्क तक पहुंची जांच
CBI की जांच राजस्थान के सीकर स्थित एक कोचिंग नेटवर्क तक भी पहुंची। चार्जशीट के मुताबिक, परीक्षा से ठीक पहले एक PDF कुछ छात्रों के बीच कथित तौर पर साझा की गई थी। इसे संभावित प्रश्नपत्र के रूप में छात्रों को दिए जाने का आरोप है। CBI का दावा है कि परीक्षा के बाद इस PDF में मौजूद कई सवालों की वास्तविक NEET प्रश्नपत्र से समानता सामने आई।
जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया कि कथित साजिश की तैयारी कई महीने पहले शुरू हो गई थी। छात्रों और अभिभावकों से पहले से संपर्क किया गया और कुछ मामलों में नकद तो कुछ में ऑनलाइन माध्यम से भुगतान हुआ।
पेपर तैयार करने की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल
CBI ने प्रश्नपत्र तैयार करने और उससे जुड़ी सुरक्षा प्रक्रिया में कथित कमियों का भी उल्लेख किया है। एजेंसी का कहना है कि कुछ विशेषज्ञों को कई मास्टर सेट तक पहुंच मिलती थी और सुरक्षा जांच में कथित कमजोरियों का फायदा उठाया गया। चार्जशीट में विशेषज्ञों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कुछ कथित लीक प्रश्नों और आधिकारिक प्रश्नपत्र में बड़े स्तर पर समानता मिलने की बात भी कही गई है।
मामला फिलहाल अदालत में है। CBI की चार्जशीट में लगाए गए आरोपों और पेश किए गए सबूतों की न्यायिक समीक्षा की जाएगी। कोर्ट आगे तय करेगी कि किन आरोपों पर संज्ञान लिया जाए और आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी।