विपक्ष पूछता सवाल,कहा बाटी नौकरियां हजार !

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच धामी सरकार रोजगार के मोर्चे पर बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है.लंबे समय से सरकारी नौकरियों का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए आने वाले कुछ महीने बेहद अहम रहने वाले हैं. उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग यूकेएसएसएससी दिसंबर से पहले विभिन्न विभागों में करीब ढाई हजार से अधिक रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है.इसके साथ ही जिन पदों पर पहले से आवेदन आमंत्रित किए जा चुके हैं. उनकी लिखित परीक्षाएं भी इसी अवधि में आयोजित करने की योजना बनाई गई है.यदि आयोग अपनी तय समय-सीमा पर खरा उतरता है,तो वर्ष 2026 के अंत तक करीब चार हजार पदों की भर्ती प्रक्रिया निर्णायक चरण में पहुंच जाएंगी. धामी सरकार का दावा है, कि पिछले साढ़े चार वर्षों के दौरान प्रदेश में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी जा चुकी है. सरकार का कहना है कि वर्ष 2024 में सख्त नकल विरोधी कानून लागू होने के बाद भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आई है.आवेदन से लेकर नियुक्ति तक की अवधि भी पहले की तुलना में कम हुई है.यही वजह है कि सरकार अब इस रिकॉर्ड को अपनी प्रमुख उपलब्धियों को गिनाते हुए आगामी चुनाव में रोजगार के मुद्दे पर मजबूती से जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है.वही विपक्षी दल प्रदेश में पेपर लीक,बेरोजगारी साथ ही पहाड़ का पानी और जवानी के नाम पर  युवाओ के भविष्य पर पानी फेरने का गंभीर आरोप सत्ता दल पर लगते हुए चुनाव में जनता के बीच जाने की तैयारी करता नजर आ रहा है.

अब तक भाजपा सरकार की मानें तो पिछले साढ़े चार वर्षों के दौरान प्रदेश में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी जा चुकी है.और आगे भी ये प्रक्रिया जारी है.राजनीतिक दृष्टि से भी इन भर्तियों को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.विधानसभा चुनाव से पहले सरकार रोजगार के मुद्दे को अपनी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल करने की तैयारी कर रही है. पिछले कुछ वर्षों में भर्ती परीक्षाओं को लेकर उठे विवादों के बाद सरकार ने नकल विरोधी कानून लागू किया था.इसके बाद भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता को लेकर लगातार दावे किए जाते रहे हैं. ऐसे में चुनाव से पहले हजारों नई भर्तियों की शुरुआत सरकार के लिए राजनीतिक संदेश देने का भी माध्यम बन सकती है.लेकिन विपक्षी दल लगातार धामी सरकार के इन दावों को धरातल पर फेल बताता नज़र आ रहा है.जिस पर चुनाव आने से पहले नई बहस को जन्म दे दिया है.

प्रदेश में आगामी 2027 के चुनाव के लिए बेहद कम समय बचा है,सभी राजनितिक दल चुनावी मैदान में अपनी तैयारी और जीत का दावा करते नजर आ रहे है.लेकिन अब तक धामी सरक़ार के कार्य काल में लगतार नौकरियों की बौछार करने का दावा किया जा रहा है. हालांकि विपक्ष बेरोजगारी,पेपर लीक पर जनता को समझने और सरकार के दावों को फेल बताने की कोशिश में जुटा है.लेकिन इसके एक तरफ सत्ताधारी चुनाव में अपनी बड़ी उपलब्धि बताने का काम करेगा और विपक्ष इसको फेल बातयेगा ऐसे में आम जनता और प्रदेश का युवा किस नजरिये से देखता है,ये बड़ा सवाल है.क्या प्रदेश में बेरोजगारी खत्म हो चुकी है. या इस पर राजनीतिक चश्मे से दिखाया जा रहा है.

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