Knews Desk– पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान ने अमेरिका को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उसके सैन्य ठिकानों या रणनीतिक परिसंपत्तियों पर दोबारा हमला किया गया, तो इसका करारा जवाब दिया जाएगा। ईरान ने साथ ही पाकिस्तान, तुर्किये और अन्य क्षेत्रीय देशों से भी अपील की है कि वे किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई में अमेरिका का साथ न दें। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई की बात कही थी।ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर, तुर्किये के विदेश मंत्री हाकन फिदान और सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान से अलग-अलग फोन पर बातचीत की। इन बातचीतों के दौरान उन्होंने क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई और कहा कि यदि अमेरिका या उसके सहयोगी देशों की ओर से ईरान पर कोई नया हमला किया जाता है, तो तेहरान पूरी ताकत के साथ जवाब देगा।
ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, अरागची ने पाकिस्तान और तुर्किये के नेताओं से कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए किसी भी ऐसे सैन्य अभियान से दूरी बनाए रखना जरूरी है, जिससे संघर्ष और बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान किसी भी तरह की “आक्रामकता” को बर्दाश्त नहीं करेगा और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।सऊदी अरब के विदेश मंत्री के साथ हुई बातचीत में भी अरागची ने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका या इजराइल ईरान के खिलाफ कोई नई सैन्य कार्रवाई करते हैं, या किसी क्षेत्रीय देश की जमीन या संसाधनों का इस्तेमाल ऐसे अभियानों में किया जाता है, तो ईरान उसे भी गंभीरता से लेगा और परिस्थितियों के अनुसार जवाब देगा।
यह घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद सामने आया है। ट्रंप ने कहा था कि तेहरान के साथ बातचीत को लेकर उनका भरोसा कम हो रहा है और जरूरत पड़ने पर अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।तनाव उस समय और बढ़ गया जब कुवैत की सेना ने दावा किया कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाले कई ड्रोन को मार गिराया। कुवैती अधिकारियों के अनुसार, ड्रोन के मलबे से उत्तरी कुवैत की एक सरकारी इमारत और बुबियन द्वीप पर कुछ संपत्तियों को नुकसान पहुंचा, हालांकि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। इस घटना ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती बयानबाजी का असर पूरे मध्य-पूर्व की सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है। यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका प्रभाव ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में क्षेत्रीय देशों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वे किसी भी संभावित संघर्ष को रोकने या बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।फिलहाल सभी की नजरें अमेरिका और ईरान की अगली रणनीति पर टिकी हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी दोनों देशों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रहा है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि क्षेत्र में तनाव कम होगा या हालात और अधिक गंभीर रूप ले सकते हैं।