Knews Desk– कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलेटिक्स के लिए शनिवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। देश के स्टार लॉन्ग डिस्टेंस धावक गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ में शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। इससे पहले वह 10,000 मीटर दौड़ में सिल्वर मेडल जीत चुके थे। 5000 मीटर में ब्रॉन्ज जीतने के साथ ही गुलवीर ने भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया। वह कॉमनवेल्थ गेम्स के एक ही संस्करण में एथलेटिक्स में दो अलग-अलग इवेंट में मेडल जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं।
भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर तैनात 28 वर्षीय गुलवीर सिंह पहले से ही भारत के सर्वश्रेष्ठ लॉन्ग डिस्टेंस धावकों में गिने जाते हैं। 3000 मीटर से लेकर 25 किलोमीटर तक की कई स्पर्धाओं में राष्ट्रीय रिकॉर्ड उनके नाम हैं। हालांकि कॉमनवेल्थ गेम्स में उनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जरूर थी, लेकिन केन्या और ऑस्ट्रेलिया जैसे मजबूत देशों के धावकों के बीच दो मेडल जीतना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं माना जा रहा।ग्लासगो में आयोजित पुरुषों की 5000 मीटर फाइनल रेस की शुरुआत से ही गुलवीर ने खुद को शीर्ष धावकों के बीच बनाए रखा। पूरे मुकाबले के दौरान उन्होंने अपनी रणनीति के अनुसार दौड़ लगाई और अंतिम लैप तक टॉप-5 में बने रहे। आखिरी लैप की शुरुआत में वह कुछ समय के लिए पांचवें स्थान पर खिसक गए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अंतिम 200 से 300 मीटर में जबरदस्त स्पीड दिखाते हुए तीसरे स्थान पर पहुंच गए।
फिनिशिंग लाइन तक पहुंचने से पहले केन्या के कॉरनेलियस केम्बोई ने उन्हें पीछे छोड़ने की पूरी कोशिश की, लेकिन गुलवीर ने दबाव में भी शानदार संयम बनाए रखा। उन्होंने 13 मिनट 24.95 सेकेंड का समय निकालते हुए ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया और केम्बोई को महज 0.04 सेकेंड से पीछे छोड़ दिया। इस स्पर्धा का गोल्ड मेडल केन्या के मैथ्यू किपसैंग ने 13:23.61 मिनट के समय के साथ जीता, जबकि ऑस्ट्रेलिया के काय रॉबिनसन ने 13:24.70 मिनट के साथ सिल्वर मेडल हासिल किया।गुलवीर सिंह की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह कॉमनवेल्थ गेम्स की 5000 मीटर दौड़ में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं। इससे पहले चार दिन पहले उन्होंने 10,000 मीटर स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर भी इतिहास रचा था। उस इवेंट में भी ऑस्ट्रेलिया के काय रॉबिनसन ने उन्हें पीछे छोड़ते हुए गोल्ड मेडल जीता था।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गुलवीर सिंह का प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स के लिए प्रेरणादायक साबित हुआ है। उन्होंने साबित कर दिया कि भारतीय धावक अब केवल भागीदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विश्व स्तर पर केन्या और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के एथलीटों को भी कड़ी चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। उनकी मेहनत, फिटनेस और मजबूत मानसिकता ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है।गुलवीर सिंह के दो पदकों ने न सिर्फ भारत की पदक तालिका को मजबूत किया, बल्कि देश के युवा खिलाड़ियों को भी यह संदेश दिया कि कठिन मेहनत और निरंतर प्रयास से किसी भी बड़े मंच पर इतिहास रचा जा सकता है। उनकी इस सफलता पर पूरे देश को गर्व है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भी वह भारत के लिए इसी तरह शानदार प्रदर्शन करते रहेंगे।