KNEWS DESK- कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया। वहीं भारत के यशवीर सिंह ने अपने आखिरी प्रयास में जबरदस्त वापसी करते हुए ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा जमाया। इसके साथ ही कॉमनवेल्थ गेम्स के पुरुष जैवलिन थ्रो में पहली बार भारत के दो खिलाड़ियों ने एक ही संस्करण में पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
गोल्ड मेडल के प्रबल दावेदार माने जा रहे नीरज इस बार खिताब नहीं जीत सके। श्रीलंका के युवा जैवलिन थ्रोअर रुमेश थरंगा पथिरागा ने 89.73 मीटर के शानदार थ्रो के साथ गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
नीरज ने लगाया सीजन का बेस्ट थ्रो
फाइनल में नीरज चोपड़ा ने संभलकर शुरुआत की। दूसरे प्रयास में उन्होंने 85.83 मीटर तक भाला फेंककर बढ़त हासिल कर ली। गंभीर चोट के बाद वापसी कर रहे नीरज का यह इस सीजन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। हालांकि उनकी बढ़त ज्यादा देर तक कायम नहीं रही।
उसी राउंड में श्रीलंका के पथिरागा ने 89.73 मीटर का थ्रो करते हुए पहला स्थान हासिल कर लिया। इसके बाद बाकी प्रयासों में नीरज अपने प्रदर्शन में सुधार नहीं कर सके और उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। नीरज ने इससे पहले 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था, जबकि चोट के कारण वह 2022 के खेलों में हिस्सा नहीं ले पाए थे।
यशवीर ने आखिरी प्रयास में पलट दिया खेल
भारत के लिए सबसे रोमांचक प्रदर्शन यशवीर सिंह ने किया। पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में उतरे यशवीर शुरुआती पांच प्रयासों के बाद छठे स्थान पर थे। उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो 81.33 मीटर था और उस समय वह मेडल की रेस से बाहर नजर आ रहे थे।
लेकिन आखिरी प्रयास में यशवीर ने शानदार वापसी की। उन्होंने 85.41 मीटर का थ्रो किया और सीधे तीसरे स्थान पर पहुंच गए। यह यशवीर के करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा। इसके साथ ही उन्होंने अपने पहले कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया। भारत के एक अन्य खिलाड़ी रोहित यादव छठे स्थान पर रहे।
अरशद नदीम पहले राउंड में बाहर
पाकिस्तान के स्टार जैवलिन थ्रोअर और डिफेंडिंग कॉमनवेल्थ चैंपियन अरशद नदीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। चोट के बाद वापसी कर रहे अरशद शुरुआती तीन प्रयासों में एक बार भी 80 मीटर का आंकड़ा पार नहीं कर पाए। वह टॉप-8 में जगह बनाने में नाकाम रहे और पहले राउंड के बाद ही प्रतियोगिता से बाहर हो गए।
इस मुकाबले में भारत को भले ही गोल्ड नहीं मिला, लेकिन नीरज और यशवीर के दो पदकों ने जैवलिन थ्रो में भारत की मजबूत मौजूदगी को एक बार फिर साबित कर दिया। खासकर यशवीर का आखिरी प्रयास भारतीय एथलेटिक्स के लिए यादगार बन गया।