Knews Desk- मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय को दोपहर 1 बजे से 2 बजे के बीच नमाज अदा करने की अनुमति दी गई है। हालांकि, जिस जमीन पर नमाज की इजाजत दी गई है, उसे लेकर स्थानीय लोगों ने विरोध दर्ज कराया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 30 जुलाई को सुनवाई के दौरान अंतरिम व्यवस्था के तहत भोजशाला परिसर के पीछे स्थित खसरा नंबर 596 और 611 की जमीन पर शुक्रवार की नमाज पढ़ने की अनुमति दी। साथ ही मध्य प्रदेश सरकार को सुरक्षा और अन्य आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आसपास रहने वाले लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि संबंधित जमीन पर वर्षों से उनकी खेती होती रही है और कुछ परिवारों के मकान भी उसी क्षेत्र में हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि यहां नियमित रूप से नमाज होगी तो उनके रहने और खेती करने पर असर पड़ेगा।
विरोध कर रहे लोगों ने स्पष्ट कहा है कि वे खसरा नंबर 596, 611 या 612 में नमाज की अनुमति का समर्थन नहीं करेंगे। उनका कहना है कि यदि वैकल्पिक व्यवस्था करनी है तो वह भोजशाला परिसर से दूर किसी अन्य स्थान पर की जाए। विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम व्यवस्था दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि शुक्रवार को निर्धारित समय में विवादित परिसर के निकट तय की गई जमीन पर नमाज अदा की जा सकती है।
मुस्लिम पक्ष ने अदालत से शुक्रवार की नमाज के लिए उपयुक्त वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की मांग की थी। यह मांग मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले के बाद उठी, जिसमें विवादित भोजशाला परिसर को मंदिर माना गया था। हाई कोर्ट के इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने विवादित परिसर में पहले जैसी व्यवस्था बहाल करने की मांग स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। फिलहाल मामले की अंतिम सुनवाई लंबित है और अंतरिम व्यवस्था के तहत तय स्थान पर ही नमाज की अनुमति दी गई है।