Knews Desk- देशभर में E20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल की बिक्री बढ़ रही है, लेकिन कई लोगों के मन में सवाल है कि जब इथेनॉल की कीमत पेट्रोल से कम मानी जाती है, तो E20 पेट्रोल सस्ता क्यों नहीं मिलता? इस सवाल का जवाब सरकार ने संसद में दिया है। सरकार का कहना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग का उद्देश्य पेट्रोल की कीमत घटाना नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और विदेशी मुद्रा की बचत करना है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने लोकसभा में बताया कि वर्ष 2025-26 के इथेनॉल सप्लाई ईयर में सरकारी तेल कंपनियां (IOCL, BPCL और HPCL) इथेनॉल लगभग 71 रुपये प्रति लीटर की औसत लागत पर खरीद रही हैं। इसमें जीएसटी और परिवहन खर्च भी शामिल है।इथेनॉल अलग-अलग स्रोतों से तैयार किया जाता है, इसलिए इसकी कीमत भी अलग होती है। गन्ने के रस, चीनी, मोलासेस और मक्के से बने इथेनॉल की लागत अलग-अलग है। इन सभी को मिलाकर औसत खरीद मूल्य करीब 66.61 रुपये प्रति लीटर बैठता है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि पेट्रोल की खुदरा कीमत तय करने में केवल इथेनॉल की लागत नहीं देखी जाती। इसमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम, डॉलर-रुपया विनिमय दर, रिफाइनिंग और परिवहन खर्च, केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स तथा तेल कंपनियों की परिचालन लागत भी शामिल होती है। इसलिए केवल इथेनॉल सस्ता होने से पेट्रोल की कीमत स्वतः कम नहीं हो जाती।
सरकार के मुताबिक मार्च से जून 2026 के बीच पेट्रोल की औसत डिपो कीमत लगभग 85.8 रुपये प्रति लीटर रही। हालांकि उपभोक्ताओं को बाजार मूल्य से कम दर पर पेट्रोल उपलब्ध कराया गया, जिससे सरकारी तेल कंपनियों को करीब 11 रुपये प्रति लीटर की अंडर-रिकवरी हुई।चार महीनों में यह नुकसान लगभग 21,300 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। सरकार का कहना है कि ऐसे में E20 पेट्रोल पर अतिरिक्त छूट देना व्यावहारिक नहीं है।
सरकार ने बताया कि पश्चिम एशिया में पैदा हुए संकट के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 70 से 80 प्रतिशत तक उछाल आया। इसके बावजूद भारत में पेट्रोल की कीमतों में केवल 7 से 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।सरकार का दावा है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण आयातित पेट्रोल पर निर्भरता कम हुई, जिससे वैश्विक कीमतों और डॉलर की मजबूती का असर भारतीय उपभोक्ताओं पर सीमित रहा। यदि यह व्यवस्था नहीं होती तो पेट्रोल की कीमत कहीं अधिक हो सकती थी।
सरकार ने संसद में यह भी कहा कि E20 ईंधन को नीति आयोग, वाहन निर्माता कंपनियों, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), SIAM और अन्य विशेषज्ञ संस्थानों की सलाह के बाद चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है।सरकार के अनुसार देश में करोड़ों दोपहिया और पेट्रोल कारें लंबे समय से E20 का उपयोग कर रही हैं। अब तक इंजन खराब होने या बड़े पैमाने पर तकनीकी दिक्कतों की कोई प्रमाणित शिकायत सामने नहीं आई है। वाहन निर्माता कंपनियां भी E20 के उपयोग पर वारंटी जारी रखे हुए हैं।
सरकार का संदेश क्या है?
सरकार का कहना है कि E20 योजना को केवल सस्ता पेट्रोल उपलब्ध कराने की योजना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसका मुख्य उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना, विदेशी तेल पर निर्भरता घटाना, किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर देना और भविष्य में ईंधन की कीमतों को अपेक्षाकृत स्थिर बनाए रखना है।