KNEWS DESK- उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में सरकारी स्कूल की मूलभूत सुविधाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन अब नए विवाद में बदल गया है। किशनपुर कस्बे स्थित सर्वोदय इंटर कॉलेज में पानी, पंखे, साफ शौचालय और बेंच जैसी सुविधाओं की मांग को लेकर छात्रों ने करीब 24 घंटे तक प्रदर्शन किया था। आंदोलन के बाद जिला प्रशासन ने छात्रों की मांगों को सही मानते हुए स्कूल में सुधार कार्य शुरू करा दिया, लेकिन अब आंदोलन का नेतृत्व करने वाले छात्र ने पुलिस पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है।
कक्षा 12 के छात्र अंकुर सोनकर का कहना है कि प्रदर्शन खत्म होने के बाद पुलिस और लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) के कर्मचारी सिविल ड्रेस में उनके और अन्य छात्रों के घर पहुंचकर पूछताछ कर रहे हैं। अंकुर का आरोप है कि उनके परिवार से उनके बारे में जानकारी ली गई और थाने आने के लिए भी कहा गया। उनका कहना है कि यदि उन्होंने कोई अपराध किया होता तो उसी समय कार्रवाई होनी चाहिए थी, लेकिन केवल स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की मांग करने पर इस तरह की पूछताछ उचित नहीं है।
अंकुर के अनुसार स्कूल में लंबे समय से पेयजल, पंखे, साफ शौचालय और पर्याप्त बेंच जैसी सुविधाओं का अभाव था। कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, जिसके बाद करीब 1800 छात्र-छात्राओं ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का फैसला किया। आंदोलन के दौरान जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS), मजिस्ट्रेट और अन्य अधिकारी स्कूल पहुंचे और छात्रों की मांगों को उचित मानते हुए समाधान का आश्वासन दिया। इसके बाद छात्रों ने धरना समाप्त कर दिया।
इस मामले में जिला प्रशासन का कहना है कि जांच के दौरान छात्रों की कई शिकायतें सही पाई गईं। प्रशासन के निर्देश पर स्कूल में शौचालयों की सफाई, खेल मैदान की सफाई, नए पंखे लगाने और आरओ सिस्टम की व्यवस्था जैसे कार्य शुरू करा दिए गए हैं। साथ ही जिले के अन्य स्कूलों को भी निर्देश दिए गए हैं कि छात्रों की जायज मांगों का समय रहते समाधान किया जाए।
हालांकि आंदोलन के बाद पुलिस की भूमिका को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य किसी छात्र को परेशान करना नहीं है। उन्होंने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई असामाजिक तत्व छात्रों के आंदोलन का फायदा न उठाए, आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ इनपुट मिले हैं कि आंदोलन में शामिल कुछ छात्र पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में भी मौजूद थे। हालांकि इस जानकारी की अभी पुष्टि की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद ही कोई निष्कर्ष निकाला जाएगा।
वहीं फतेहपुर के पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने छात्रों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पुलिस और एलआईयू की टीम केवल सामान्य पूछताछ और तथ्य जुटाने के लिए छात्रों के घर गई थी। उनका कहना है कि किसी भी छात्र को डराने, धमकाने या दबाव बनाने जैसी कोई कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस के मुताबिक यह पूरी प्रक्रिया कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से की गई थी।
फिलहाल यह मामला शिक्षा व्यवस्था, छात्रों के अधिकार और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर छात्रों का कहना है कि उन्होंने केवल बुनियादी सुविधाओं की मांग उठाई थी, वहीं प्रशासन और पुलिस का कहना है कि उनकी कार्रवाई केवल तथ्यों की पुष्टि और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए थी।