Knews Desk- सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने वाले Clocked It, Delulu, FOMO और M.I.A. जैसे Gen-Z स्लैंग्स अब संसद की बहस का भी हिस्सा बन गए हैं। पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई सांसदों ने इन शब्दों का इस्तेमाल किया। इसके बाद इंटरनेट पर लोग इनका मतलब खोजने लगे। आखिर ये शब्द क्या हैं और युवाओं के बीच इतने लोकप्रिय क्यों हैं? आइए जानते हैं।
पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान कई सांसदों ने अपने भाषण में सोशल मीडिया पर इस्तेमाल होने वाली भाषा अपनाई। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने FOMO और M.I.A. का जिक्र किया। वहीं भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने Clocked It शब्द का इस्तेमाल करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा।
इसके अलावा भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या, श्रीकांत शिंदे, एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले और कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी अपने भाषण में Gen-Z स्लैंग्स का इस्तेमाल किया। संसद की कार्यवाही में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में इन इंटरनेट शब्दों के इस्तेमाल ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
Clocked It का क्या मतलब है?
Clocked It का मतलब होता है किसी बात को तुरंत समझ जाना या किसी की मंशा, गलती या स्थिति को सही तरीके से पहचान लेना। अगर कोई व्यक्ति बिना बताए किसी बात को पकड़ ले, तो Gen-Z भाषा में कहा जाता है कि उसने Clocked It।
Delulu शब्द Delusion से निकला है। इसका इस्तेमाल ऐसे व्यक्ति के लिए किया जाता है जो हकीकत से दूर किसी भ्रम या अवास्तविक उम्मीद में जी रहा हो। सोशल मीडिया पर इसे अक्सर मजाकिया अंदाज में इस्तेमाल किया जाता है।
FOMO का पूरा नाम Fear Of Missing Out है। इसका मतलब है किसी अवसर, ट्रेंड, पार्टी, इवेंट या अनुभव से छूट जाने का डर। सोशल मीडिया के दौर में यह शब्द सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले इंटरनेट स्लैंग्स में शामिल है।
M.I.A. का क्या अर्थ है?
M.I.A. यानी Missing In Action इसका इस्तेमाल उस व्यक्ति के लिए किया जाता है जो लंबे समय से दिखाई न दे रहा हो या किसी गतिविधि से अचानक गायब हो गया हो। आजकल सोशल मीडिया और चैटिंग में भी यह शब्द काफी आम हो चुका है।
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने संसद में अपने भाषण के दौरान ‘वास्ते गुना हुइया’ का भी जिक्र किया। यह सोशल मीडिया पर वायरल हुआ एक मीम और ट्रेंडिंग फ्रेज है। इसका कोई आधिकारिक अर्थ नहीं माना जाता, लेकिन इंटरनेट पर इसे मजाकिया और हल्के-फुल्के अंदाज में इस्तेमाल किया जाता है। माना जाता है कि यह एक पुराने वायरल वीडियो से लोकप्रिय हुआ और बाद में रील्स व मीम्स के जरिए तेजी से फैल गया।
सोशल मीडिया की भाषा अब संसद तक
Gen-Z स्लैंग्स पहले केवल Instagram Reels, X, YouTube Shorts और मीम्स तक सीमित माने जाते थे। लेकिन अब इनका असर राजनीति और सार्वजनिक संवाद में भी दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि युवा मतदाताओं तक अपनी बात प्रभावी तरीके से पहुंचाने के लिए नेता अब उसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसे आज की पीढ़ी आसानी से समझती और अपनाती है।
संसद में Gen-Z स्लैंग्स की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि डिजिटल संस्कृति अब केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रही, बल्कि देश के सबसे बड़े लोकतांत्रिक मंच तक भी पहुंच चुकी है। आने वाले समय में राजनीति, शिक्षा और सार्वजनिक संवाद में ऐसे इंटरनेट स्लैंग्स का इस्तेमाल और बढ़ सकता है।