Knews Desk– मुगल साम्राज्य के इतिहास में शराब को लेकर एक बड़ा विरोधाभास देखने को मिलता है। कई मुगल बादशाह खुद शराब और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करते थे, लेकिन समय-समय पर उन्होंने अपने शासन में शराबबंदी लागू करने की भी कोशिश की। बाबर से लेकर औरंगज़ेब तक अलग-अलग शासकों ने शराब पर नियंत्रण के लिए कदम उठाए, लेकिन कोई भी पूरी तरह सफल नहीं हो सका। सामाजिक आदतें, प्रशासनिक कमजोरियां और अमीर वर्ग की जीवनशैली ऐसी रही कि शराबबंदी सिर्फ फरमानों तक सीमित रह गई।
मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर ने अपनी आत्मकथा बाबरनामा में शराब पीने की आदत का खुलकर जिक्र किया है। हालांकि, 1527 में खानवा के युद्ध से पहले उन्होंने शराब छोड़ने का संकल्प लिया। बाबर ने अपने शराब के बर्तन तक तुड़वा दिए और सेना के अधिकारियों व सैनिकों से भी शराब छोड़ने की अपील की। इतिहासकारों के अनुसार, इस फैसले ने सैनिकों का मनोबल बढ़ाने में मदद की, लेकिन पूरे समाज में शराबबंदी लागू नहीं हो सकी।अकबर शराब का विरोधी नहीं था, लेकिन वह संयमित जीवन का समर्थक माना जाता है। उसने शराब पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय उसके उपयोग को नियंत्रित करने की नीति अपनाई। शराब की बिक्री को लाइसेंस के दायरे में रखा गया और सार्वजनिक स्थानों पर नशाखोरी को हतोत्साहित किया गया। इतिहासकारों का मानना है कि अकबर का उद्देश्य पूर्ण शराबबंदी नहीं, बल्कि सामाजिक अनुशासन बनाए रखना था।
जहांगीर का नाम मुगल इतिहास के सबसे बड़े शराब प्रेमी बादशाहों में लिया जाता है। उसने अपनी आत्मकथा तुज़ुक-ए-जहांगीरी में स्वीकार किया कि युवावस्था में वह प्रतिदिन कई प्याले शराब पीता था। स्वास्थ्य बिगड़ने पर उसने शराब कम करने की कोशिश भी की। दिलचस्प बात यह है कि गद्दी संभालते ही उसने अपने प्रसिद्ध बारह शाही आदेशों में शराब और अन्य नशीले पदार्थों के निर्माण और बिक्री पर रोक लगाने का आदेश भी शामिल किया। हालांकि, खुद शराब की लत से बाहर न निकल पाने के कारण उसका यह फैसला व्यवहार में कभी प्रभावी नहीं हो पाया।शाहजहां अपने पिता जहांगीर की तुलना में अधिक संयमित माना जाता था। वह कभी-कभार शराब पीता था, लेकिन नशे का आदी नहीं था। उसने भी शराबबंदी लागू नहीं की, हालांकि सार्वजनिक रूप से शराब के प्रचार या खुले सेवन को बढ़ावा नहीं दिया। उसके शासनकाल में नैतिक अनुशासन पर जोर दिया गया, लेकिन शराब के व्यापार पर कोई व्यापक प्रतिबंध नहीं लगाया गया।
मुगल बादशाहों में औरंगज़ेब एकमात्र ऐसा शासक था जिसने स्वयं शराब से पूरी तरह दूरी बनाए रखी। सत्ता संभालने के बाद उसने शराब, भांग और अन्य नशीले पदार्थों के सार्वजनिक व्यापार पर रोक लगाने के लिए कई फरमान जारी किए। शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया, नैतिक निरीक्षक नियुक्त किए गए और सार्वजनिक मद्यपान पर कार्रवाई भी हुई। इसके बावजूद शराब का कारोबार गुप्त रूप से चलता रहा। सेना, अमीर वर्ग और विदेशी व्यापारियों के जरिए शराब की उपलब्धता बनी रही, जिससे औरंगज़ेब की शराबबंदी सफल नहीं हो सकी।इतिहासकारों और विदेशी यात्रियों के विवरण बताते हैं कि औरंगज़ेब स्वयं शराब नहीं पीता था, लेकिन उसके कई दरबारी और अधिकारी गुप्त रूप से शराब का सेवन करते थे। यहां तक कि जिन लोगों को वह शराब से दूर मानता था, उनके बारे में भी बाद में अलग-अलग विवरण सामने आए। इससे साफ होता है कि शाही आदेशों के बावजूद शराब की खपत पर पूरी तरह रोक लगाना संभव नहीं था।