KNEWS DESK- कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर छात्रों के आंदोलनों को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि जवाबदेही और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग करने वाले छात्रों के साथ सरकार ऐसा व्यवहार कर रही है, मानो वे देश के भविष्य नहीं बल्कि राष्ट्र के दुश्मन हों। सोनिया गांधी ने कहा कि छात्रों की आवाज़ को सुनने और उनकी चिंताओं का समाधान करने के बजाय सरकार ने दमन और पुलिस कार्रवाई का रास्ता चुना है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
सोनिया गांधी ने द हिंदू अखबार में प्रकाशित अपने लेख “शिक्षा व्यवस्था का पतन, युवा भारत की पीड़ा” में देश की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था और सरकार की नीतियों पर विस्तार से सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि आज का छात्र केवल बेहतर शिक्षा ही नहीं, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और अपने भविष्य की सुरक्षा की मांग कर रहा है। लेकिन सरकार इन मांगों को गंभीरता से लेने के बजाय विरोध की हर आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि देश के युवाओं में बढ़ती निराशा का सबसे बड़ा कारण शिक्षा व्यवस्था की लगातार गिरती स्थिति और सरकार का जवाबदेही तय करने से इनकार है। उनके अनुसार, छात्रों का आंदोलन अचानक पैदा नहीं हुआ, बल्कि यह लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का स्वाभाविक परिणाम है। रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं, परीक्षा प्रणाली पर उठते सवाल और शिक्षा संस्थानों में बढ़ते दबाव ने युवाओं को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया है। सोनिया गांधी ने कहा कि किसी भी लोकतंत्र में छात्रों की आवाज़ को सम्मान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ खड़ा होना केवल राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नैतिक और संवैधानिक दायित्व भी है। यदि देश का युवा अपने भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त कर रहा है, तो सरकार की जिम्मेदारी है कि वह संवाद करे, समाधान निकाले और विश्वास बहाल करे।
अपने लेख में उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ कठोर रवैया अपनाया। उनका कहना था कि सरकार ने छात्रों के साहस का जवाब कायरता और अकारण क्रूरता से दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं, बल्कि आंदोलनों को दबाना बन गई है। सोनिया गांधी ने पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री के प्रत्यक्ष अधिकार क्षेत्र में आने वाली पुलिस द्वारा छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसे मौके आए हैं, जब शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और नागरिकों पर बल प्रयोग किया गया।
उन्होंने वर्ष 2020 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) के खिलाफ हुए प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान विश्वविद्यालय परिसरों में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की कार्रवाई पूरे देश ने देखी थी। उनके अनुसार, उस समय कई छात्रों के साथ बल प्रयोग हुआ और शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता पर भी सवाल उठे। सोनिया गांधी ने महिला पहलवानों के आंदोलन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि न्याय की मांग कर रही देश की महिला खिलाड़ियों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, उसे भी भुलाया नहीं जा सकता। उनके मुताबिक, सरकार का यह रवैया दिखाता है कि विरोध करने वालों के प्रति उसका दृष्टिकोण लगातार कठोर होता जा रहा है।
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर चिंता जताई। उनका कहना था कि देश के लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं। परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को इन समस्याओं की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए व्यापक सुधार करने चाहिए। सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि देश के छात्र सरकार के उन दावों की वास्तविकता सामने ला रहे हैं, जिनमें शिक्षा और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की बात की जाती है। उनके अनुसार, यदि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, निष्पक्ष परीक्षाएं और रोजगार के अवसर नहीं मिलेंगे, तो देश के विकास के दावे अधूरे रह जाएंगे।
वहीं, इस पूरे मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात जारी एक रिकॉर्डेड संदेश में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सरकार पिछले ढाई महीनों से कथित NEET पेपर लीक मामले से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए लगातार काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोबारा परीक्षा आयोजित कराने और समय पर परिणाम घोषित करने का फैसला इसलिए लिया गया, ताकि लगभग 22 लाख छात्रों का एक शैक्षणिक वर्ष बर्बाद न हो। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी बताया कि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए कानूनी सुधार की दिशा में आगे बढ़ रही है। उनके अनुसार, प्रस्तावित नए कानून में परीक्षा से जुड़े अपराधों के मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट का प्रावधान किया जाएगा। साथ ही दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा सुनिश्चित करने का भी प्रावधान होगा। उन्होंने कहा कि कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद इस विधेयक को संसद के मानसून सत्र के दूसरे सप्ताह में पेश किया जाएगा।
इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर विपक्ष सरकार पर छात्रों की आवाज़ दबाने और शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगा रहा है, वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर शिक्षा, परीक्षा प्रणाली और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर व्यापक बहस देखने को मिल सकती है।