Knews Desk– शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही की मांग को लेकर 26 दिनों से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। अनशन खत्म करने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा कि उनकी लड़ाई खत्म नहीं हुई है, बल्कि अब जवाबदेही की शुरुआत हुई है। वांगचुक ने बताया कि सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों से मिले भरोसे के बाद उन्होंने यह फैसला लिया है।
वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा कि उन्हें केंद्र सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया है कि देश की खराब होती परीक्षा प्रणाली और उसमें जवाबदेही तय करने के मुद्दे पर संसद में चर्चा कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि यह केवल उनका व्यक्तिगत आंदोलन नहीं था, बल्कि लाखों छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल है। इसलिए संसद में इस मुद्दे पर गंभीर बहस होना बेहद जरूरी है।सोनम वांगचुक ने यह भी बताया कि सरकार ने उन्हें भरोसा दिया है कि हाल ही में नीट परीक्षा पेपर लीक मामले से जुड़े उन परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा, जिनके बच्चों ने कथित तौर पर मानसिक तनाव के चलते आत्महत्या जैसा कदम उठाया। इसके अलावा शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के खिलाफ किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई या नए मुकदमे दर्ज नहीं किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि सरकार अपने इन वादों पर अमल करती है तो यह छात्रों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
वांगचुक ने बताया कि उनके अनशन के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसद उनसे मिलने पहुंचे। इन सांसदों ने उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की और लिखित रूप से यह भरोसा दिया कि वे संसद के भीतर परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक की घटनाओं और जवाबदेही तय करने की मांग को मजबूती से उठाएंगे। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के प्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है, जिससे उन्हें सकारात्मक उम्मीद मिली।उन्होंने यह भी बताया कि सरकार की ओर से आए मंत्रियों ने भी उनसे बातचीत की और आश्वासन दिया कि परीक्षा सुधार और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। वांगचुक ने कहा कि वह पहले इन आश्वासनों का लिखित रूप में इंतजार कर रहे थे, जिसके कारण उन्हें अपना अनशन निर्धारित समय से कुछ और दिन बढ़ाना पड़ा। आखिरकार मिले भरोसे के बाद उन्होंने 23 जुलाई को अपना 26 दिन पुराना अनशन समाप्त करने का फैसला किया।
सोनम वांगचुक ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि अनशन खत्म होने का मतलब आंदोलन का अंत नहीं है। उन्होंने कहा कि अब सबसे महत्वपूर्ण चरण जवाबदेही का है। सरकार, संसद और सभी राजनीतिक दलों को अपने वादों को निभाना होगा। यदि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई तो भविष्य में छात्रों का विश्वास और कमजोर होगा।उन्होंने देशभर के छात्रों, युवाओं, शिक्षकों और आम नागरिकों का भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने इस आंदोलन का शांतिपूर्ण तरीके से समर्थन किया। वांगचुक ने कहा कि लोकतंत्र में संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया के जरिए ही स्थायी समाधान निकलते हैं। अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि सरकार और संसद में किए गए वादे कितनी जल्दी जमीन पर उतरते हैं और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।