Knews Desk- भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे कारोबारी दिन भी गिरावट देखने को मिली। गुरुवार को सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान पर बंद हुए। इस लगातार बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। बीते चार कारोबारी सत्रों में निवेशकों की कुल संपत्ति में करीब 13.43 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई है।
23 जुलाई के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 364 अंक फिसलकर 76,391 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 127 अंक टूटकर 23,870 के स्तर पर आ गया। इससे पहले भी पूरे सप्ताह बाजार पर दबाव बना रहा और दोनों प्रमुख सूचकांक लगातार गिरावट के साथ बंद हुए।
4 दिनों में कितना हुआ नुकसान?
शेयर बाजार में जारी बिकवाली के कारण बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन घटकर 480.05 लाख करोड़ रुपये रह गया, जो कुछ दिन पहले 484.29 लाख करोड़ रुपये था। इस तरह केवल चार दिनों में निवेशकों की संपत्ति में करीब 13.43 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई।
आखिर क्यों टूट रहा है बाजार?
1. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई को लेकर आशंकाओं और लाल सागर में जहाजों पर हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 98 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। महंगे कच्चे तेल का असर एयरलाइन, पेंट और ऑयल सेक्टर की कंपनियों पर साफ दिखाई दे रहा है।
2. अमेरिकी टैरिफ का असर
अमेरिका द्वारा जेनेरिक दवाओं पर भारी आयात शुल्क लगाने की चेतावनी से भारतीय फार्मा कंपनियों के शेयर दबाव में आ गए हैं। इस घोषणा के बाद कई दिग्गज दवा कंपनियों में तेज बिकवाली देखने को मिली।
3. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव के कारण विदेशी निवेशकों का रुझान कमजोर हुआ है, जिसका सीधा असर बाजार पर पड़ा है।
4. कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजे
कई बड़ी कंपनियों के उम्मीद से कमजोर वित्तीय परिणाम भी बाजार की धारणा पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं। इससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ और बिकवाली का दबाव बढ़ गया।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर तनाव कम नहीं होता, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी नहीं आती और विदेशी निवेशकों की बिकवाली थमती नहीं है, तब तक भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचने और लंबी अवधि की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।