कुकरेल नाइट सफारी परियोजना को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी, लखनऊ में बनेगी देश की पहली अर्बन नाइट सफारी

Knews Desk– उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी कुकरेल नाइट सफारी और जूलॉजिकल पार्क परियोजना को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने परियोजना को आगे बढ़ाने की अनुमति देते हुए पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर दायर आपत्तियों को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि विकास कार्यों को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सभी पर्यावरणीय मानकों और विशेषज्ञों की सिफारिशों का पालन हो।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पुराने हो चुके चिड़ियाघरों के आधुनिकीकरण की आवश्यकता है और यदि परियोजना निर्धारित शर्तों, वैज्ञानिक अध्ययन तथा विशेषज्ञों की निगरानी में लागू की जाती है तो इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया, जिसमें परियोजना को मंजूरी दी जा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने CEC को निर्देश दिया है कि वह परियोजना स्थल का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करे कि सभी पर्यावरणीय शर्तों का पालन हो रहा है। समिति को तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत में सौंपनी होगी।

करीब 1,500 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना दो चरणों में विकसित की जाएगी। पहले चरण में लगभग 500 हेक्टेयर क्षेत्र में देश की पहली अर्बन नाइट सफारी तैयार की जाएगी। इसके साथ ही एडवेंचर पार्क, पर्यटक सुविधाएं, प्रवेश द्वार, टिकट काउंटर और अन्य बुनियादी ढांचे का भी निर्माण किया जाएगा। परियोजना के तहत एडवेंचर पार्क के पहले चरण के लिए करीब 631 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है और टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

उत्तर प्रदेश सरकार का दावा है कि कुकरेल नाइट सफारी परियोजना से लखनऊ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी। साथ ही इससे पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का कहना है कि आधुनिक सुविधाओं से लैस यह परियोजना वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता और पर्यटन को एक साथ बढ़ावा देने का माध्यम बनेगी।

सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद अब परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूरे निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन किया जाएगा और विशेषज्ञ संस्थाओं की निगरानी जारी रहेगी।

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