‘महाप्रभु जगन्नाथ’ फिल्म विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, ओडिशा हाईकोर्ट के प्रतिबंध को दी चुनौती

Knews Desk- भगवान जगन्नाथ पर आधारित एनीमेशन फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ की रिलीज पर ओडिशा हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई रोक अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। फिल्म के निर्माताओं ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए इसे 17 जुलाई को सूचीबद्ध करने का फैसला किया है।

फिल्म की रिलीज पर रोक लगने के बाद निर्माताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि फिल्म रिलीज के लिए पूरी तरह तैयार है और देशभर के 300 से अधिक सिनेमाघरों में इसकी स्क्रीनिंग तय हो चुकी है। ऐसे में अंतिम समय पर लगी रोक से निर्माताओं को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

हालांकि मुख्य न्यायाधीश ने उसी दिन सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि तत्काल सूचीबद्धता केवल अत्यंत विशेष परिस्थितियों, जैसे मृत्युदंड से जुड़े मामलों में की जाती है। इसके बावजूद उन्होंने भरोसा दिलाया कि मामले पर अगले दिन सुनवाई होगी।

निर्माताओं की ओर से दलील दी गई कि यह बच्चों के लिए बनाई गई एक एनीमेशन फिल्म है, जिसे केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने सिनेमैटोग्राफ अधिनियम की धारा 5 के तहत प्रमाणपत्र जारी कर प्रदर्शन की अनुमति दी है। इसके बावजूद ओडिशा हाईकोर्ट ने यह कहते हुए फिल्म की देशव्यापी रिलीज पर रोक लगा दी कि इसका कथानक स्कंद पुराण में वर्णित विवरण के अनुरूप नहीं है। याचिका में यह भी कहा गया कि हाईकोर्ट ने फिल्म की रिलीज से ठीक पहले दायर जनहित याचिका पर जल्दबाजी में आदेश पारित किया, जिससे निर्माताओं को गंभीर आर्थिक और व्यावसायिक नुकसान होने की आशंका है।

इस विवाद के बीच श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (SJMC) ने भी फिल्म पर आपत्ति जताई है। समिति का कहना है कि फिल्म में भगवान जगन्नाथ के जीवन का काल्पनिक चित्रण किया गया है, जो धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथाओं से मेल नहीं खाता। समिति के अध्यक्ष गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब ने फिल्म निर्माताओं से इसकी रिलीज स्थगित करने की अपील करते हुए कहा कि फिल्म का ट्रेलर भी शास्त्रों के अनुरूप नहीं है और इससे श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

अब इस मामले में सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि फिल्म की रिलीज पर लगी रोक बरकरार रहेगी या निर्माताओं को प्रदर्शन की अनुमति मिलेगी।

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