KGMU Convocation 2026: MBBS छात्रा दीप्ति शर्मा ने जीते 19 मेडल, रचा नया इतिहास

Knews Desk- किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), लखनऊ के 22वें दीक्षांत समारोह में एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहा—दीप्ति शर्मा। एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने वाली इस मेधावी छात्रा ने ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जो विश्वविद्यालय के इतिहास में बेहद खास माना जा रहा है। दीप्ति को एक-दो नहीं, बल्कि कुल 19 मेडल और पुरस्कार प्रदान किए गए। इनमें विश्वविद्यालय के तीन सबसे प्रतिष्ठित सम्मान हीवेट मेडल, चांसलर मेडल और यूनिवर्सिटी मेडल भी शामिल हैं। इस उपलब्धि के साथ वह KGMU के इतिहास में इन तीनों सर्वोच्च सम्मानों को एक साथ हासिल करने वाली सातवीं छात्रा बन गई हैं।दीक्षांत समारोह के दौरान जैसे ही दीप्ति शर्मा का नाम बार-बार मंच से पुकारा गया, पूरा सभागार तालियों की गूंज से भर उठा। हर बार जब वह मंच पर सम्मान लेने पहुंचीं, तो दर्शकों ने उनका उत्साह बढ़ाया। खास बात यह रही कि हीवेट मेडल मिलने के दौरान KGMU की वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार मुख्य अतिथि, शिक्षक, छात्र और अभिभावक सभी अपनी सीटों से खड़े होकर उनका सम्मान करते नजर आए। यह पल न सिर्फ दीप्ति बल्कि उनके परिवार और पूरे विश्वविद्यालय के लिए गर्व का क्षण बन गया।

दीप्ति शर्मा एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता अनुज कुमार शर्मा भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हैं, जबकि उनकी मां सुषमा शर्मा ने हमेशा उनकी पढ़ाई और करियर में पूरा सहयोग दिया। उनकी बड़ी बहन रुचिका शर्मा हरियाणा सरकार में पशु चिकित्सक (Veterinary Doctor) के रूप में कार्यरत हैं। दीक्षांत समारोह में दीप्ति अपनी मां के साथ मंच पर सम्मान ग्रहण करने पहुंचीं। यह दृश्य पूरे परिवार के लिए भावुक और यादगार बन गया।दीप्ति की सफलता किसी संयोग का परिणाम नहीं है। उन्होंने बचपन से ही पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट दोनों में शानदार अंक हासिल करने के बाद उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उनका कहना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। नियमित पढ़ाई, समय पर रिवीजन, अनुशासित दिनचर्या और विषयों को गहराई से समझने की आदत ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रही। उनके अनुसार डॉक्टर बनना केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है।

एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद अब दीप्ति शर्मा का लक्ष्य पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) करना है। वह आगे किसी विशेषज्ञता वाले क्षेत्र में प्रशिक्षण लेकर मरीजों की बेहतर सेवा करना चाहती हैं। उनका मानना है कि चिकित्सा के क्षेत्र में सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती और एक अच्छे डॉक्टर को हमेशा नई तकनीकों और शोध से जुड़े रहना चाहिए।

दीप्ति को मिले 19 सम्मानों में हीवेट मेडल, चांसलर मेडल, यूनिवर्सिटी मेडल, विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कई गोल्ड मेडल, नकद पुरस्कार और बुक प्राइज शामिल हैं। इनमें सबसे खास हीवेट मेडल माना जाता है, जिसे KGMU का सर्वोच्च छात्र सम्मान माना जाता है। यह पुरस्कार केवल उस छात्र या छात्रा को दिया जाता है जिसने पूरे एमबीबीएस पाठ्यक्रम में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया हो। इसी तरह चांसलर मेडल और यूनिवर्सिटी मेडल भी संस्थान के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में गिने जाते हैं। तीनों पुरस्कार एक साथ हासिल करना बेहद दुर्लभ उपलब्धि मानी जाती है।

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए KGMU की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संस्थान में 60 नई पीजी सीटें जोड़ी गई हैं। साथ ही हार्ट ट्रांसप्लांट और लंग ट्रांसप्लांट जैसी अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाओं की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय चिकित्सा शिक्षा, शोध और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।

दीप्ति शर्मा की यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा भी है जो मेडिकल क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। मेहनत, अनुशासन और निरंतर सीखने की इच्छा से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। KGMU के इतिहास में दर्ज हुआ उनका नाम आने वाले वर्षों तक छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

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