Knews Desk- कर्नाटक में सरकारी परिवहन व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें हेडलाइट खराब होने के बावजूद एक सरकारी बस को रात के अंधेरे में करीब 84 किलोमीटर तक मोबाइल टॉर्च की रोशनी के सहारे चलाया गया। यह घटना कल्याण कर्नाटक रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (KKRTC) की बस से जुड़ी बताई जा रही है, जो कलबुर्गी से चिंचोली के बीच नियमित रूप से संचालित होती है।
जानकारी के अनुसार, बस की हेडलाइट पिछले लगभग 15 दिनों से खराब थी, लेकिन इसके बावजूद उसे ठीक नहीं कराया गया और वाहन को रूट पर चलाया जाता रहा। घटना वाली रात जब बस कलबुर्गी से चिंचोली के लिए रवाना हुई, तब भी हेडलाइट काम नहीं कर रही थी। इसके बावजूद बस को अंधेरे में यात्रा जारी रखने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

यात्रा के दौरान स्थिति और भी चिंताजनक हो गई जब बस कंडक्टर ने अपने मोबाइल फोन की टॉर्च चालू कर दी और उसे चालक के पास रखकर सड़क पर हल्की रोशनी देने की कोशिश की। इसी बेहद सीमित रोशनी के सहारे चालक ने लगभग 84 किलोमीटर का सफर तय किया और बस को सुरक्षित चिंचोली तक पहुंचाया। हालांकि इस दौरान यात्रियों को भारी असुरक्षा का सामना करना पड़ा और किसी भी समय संभावित दुर्घटना का खतरा बना रहा।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला तेजी से वायरल हो गया। वीडियो के वायरल होने के बाद परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर आलोचना तेज हो गई है।
राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है। विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने राज्य सरकार और परिवहन विभाग पर निशाना साधते हुए इसे प्रशासनिक विफलता का उदाहरण बताया है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि बुनियादी सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर यात्रियों की जान को जोखिम में डाला गया।
स्थानीय लोगों और यात्रियों में भी इस घटना को लेकर नाराजगी देखने को मिली है। लोगों का कहना है कि यदि इस दौरान कोई हादसा हो जाता तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता। उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि सरकारी वाहनों की नियमित जांच और मरम्मत समय पर की जाए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। फिलहाल, यह मामला राज्य में सार्वजनिक परिवहन की स्थिति और सुरक्षा मानकों पर एक बड़ा सवाल बनकर सामने आया है।