Knews Desk- भारत में बिजली की बढ़ती मांग और कोयले की बढ़ती खपत के बीच केंद्र सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने ‘जीरो कोल लीकेज’ योजना को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य कोयले की पूरी सप्लाई चेन में किसी भी तरह की चोरी, अवैध खनन और लीकेज को पूरी तरह खत्म करना है। इसका लक्ष्य खदान से लेकर बिजलीघर तक हर टन कोयले की सुरक्षित और पारदर्शी आपूर्ति सुनिश्चित करना है, ताकि बिजली उत्पादन बिना किसी बाधा के जारी रह सके और सरकारी राजस्व की हानि भी रोकी जा सके।
हाल ही में देश में बिजली की मांग में तेज़ी से वृद्धि देखी गई है। जून 2026 में कमजोर मानसून और भीषण गर्मी के कारण एसी और कूलर का उपयोग काफी बढ़ गया, जिससे बिजली की खपत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इसी दौरान कोयले से होने वाला बिजली उत्पादन भी तेजी से बढ़ा, क्योंकि यह अभी भी देश की ऊर्जा जरूरतों का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है। हालांकि, सौर और पवन ऊर्जा में वृद्धि के बावजूद वे पूरी मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं हो सके, क्योंकि सौर ऊर्जा केवल दिन में उपलब्ध होती है और पवन व जल विद्युत उत्पादन मौसम पर निर्भर करता है।
इन्हीं परिस्थितियों में कोयले की निर्बाध आपूर्ति सरकार की प्राथमिकता बन गई है। लेकिन समस्या केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि अवैध खनन और कोयला चोरी लंबे समय से एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। झारखंड जैसे राज्यों में कोयला माफिया सक्रिय हैं, जहां हर साल हजारों करोड़ रुपये का कोयला अवैध रूप से निकाला जाता है। हाल के महीनों में कई बड़ी घटनाएं भी सामने आई हैं, जिनमें सैकड़ों टन कोयले की लूट और दर्जनों अवैध खदानों को बंद किया गया है।
इन समस्याओं को रोकने के लिए सरकार ने कई सख्त कदम उठाए हैं। CISF और कोल इंडिया के अधिकारियों को अब अवैध खनन क्षेत्रों में तलाशी और जब्ती के विशेष अधिकार दिए गए हैं। संवेदनशील खदानों में क्विक रिस्पॉन्स टीमें तैनात की जा रही हैं, जो किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई करेंगी। इसके अलावा, खदानों और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क पर 24 घंटे डिजिटल निगरानी की व्यवस्था की जा रही है, जिसमें हाई-रेजोल्यूशन कैमरे और कंट्रोल सेंटर शामिल हैं। साथ ही ई-वे बिल की सख्त जांच के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल वैध कोयला ही बाजार तक पहुंचे।
सरकार का मानना है कि कोयला चोरी अब सिर्फ छोटे स्तर की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह संगठित अपराध का रूप ले चुकी है, जो ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक व्यवस्था दोनों को प्रभावित करती है। इसलिए ‘जीरो कोल लीकेज’ योजना का उद्देश्य सिर्फ चोरी रोकना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है, ताकि देश की बिजली जरूरतें बिना रुकावट पूरी हो सकें और कोयला संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।