डिजिटल डेस्क- मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के पिपलोदा तहसील के अंतर्गत आने वाले हथनारा गांव से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है। यहाँ मोहर्रम का पारंपरिक जुलूस उस समय चीख-पुकार और मातम में बदल गया, जब जुलूस में शामिल ताजिया ऊपर से गुजर रही हाई टेंशन बिजली की लाइन से टकरा गया। तार के संपर्क में आते ही पूरे इलाके में तेज करंट फैल गया, जिससे एक दर्जन से ज्यादा लोग गंभीर रूप से झुलस गए।
मोड़ पर हुआ हादसा, संभलने का नहीं मिला मौका
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ताजिया का जुलूस अपने तय रास्ते से गुजर रहा था। जैसे ही ताजिया एक मोड़ पर पहुँचा, उसका ऊपरी हिस्सा वहाँ से गुजर रही हाई वोल्टेज लाइन की चपेट में आ गया। करंट इतना जोरदार था कि मौके पर मौजूद लोगों को संभलने का जरा सा भी मौका नहीं मिला।
अस्पताल में अफरा-तफरी, मौतों के आँकड़े पर असमंजस
हादसे के तुरंत बाद आनन-फानन में सभी घायलों को रतलाम मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने अब तक दो लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि ग्रामीणों का दावा है कि इस हादसे में तीन लोगों की जान जा चुकी है। फिलहाल प्रशासन दो मौतों की ही बात कह रहा है। अस्पताल में भर्ती घायलों में से पांच की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। एएसपी राकेश पांडरो ने बताया कि करंट की चपेट में आए लोगों का मेडिकल कॉलेज में इलाज जारी है। घटना के हर पहलू को देखा जा रहा है और इस पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।”
कागजों में सिमटे नियम, तालमेल की कमी आई सामने
इस दर्दनाक हादसे ने बिजली विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नियमानुसार, किसी भी धार्मिक जुलूस या ताजिया निकालने से पहले पुलिस, प्रशासन और बिजली कंपनी मिलकर रूट का मुआयना करते हैं। ताजियों की ऊंचाई को देखते हुए या तो तारों को ऊंचा किया जाता है या जुलूस के दौरान बिजली सप्लाई बंद रखी जाती है। लेकिन हथनारा गांव में इन नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया, जिसकी भारी कीमत मासूमों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।