लखनऊ अग्निकांड में बड़ा खुलासा… LDA की जांच में 5 जोनल अधिकारियों समेत 18 इंजीनियर और अधिकारी मिले दोषी

डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार दोपहर एक तीन मंजिला इमारत में भीषण आग लग गई थी, जिसमें दम घुटने के कारण 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। जांच में सामने आया है कि यह इमारत पूरी तरह से ‘डेथ ट्रैप’ (मौत का कुआं) बन चुकी थी। इस पूरी बिल्डिंग में आने-जाने के लिए सिर्फ एक ही मुख्य रास्ता था, जिसमें एयर-कंडीशनिंग पैनल और बिजली के उलझे हुए तार लगे थे। आग लगने के बाद आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने के लिए कोई वैकल्पिक या इमरजेंसी एग्जिट नहीं था, जिसके चलते अंदर फंसे लोग बाहर नहीं निकल पाए।

एलडीए की जांच में 18 अधिकारी और इंजीनियर दोषी

इस दर्दनाक हादसे के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण की जांच रिपोर्ट में एक बड़ा खुलासा हुआ है। एलडीए की आंतरिक जांच में 5 जोनल अधिकारियों सहित कुल 18 इंजीनियरों और संबंधित अधिकारियों को इस गंभीर लापरवाही के लिए दोषी पाया गया है। एलडीए उपाध्यक्ष ने इन सभी दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की संस्तुति करते हुए अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। इससे पहले इस मामले में एलडीए एक जूनियर इंजीनियर (JE) और एक असिस्टेंट इंजीनियर (AE) को तत्काल प्रभाव से निलंबित भी कर चुका है।

नक्शा आवासीय और इस्तेमाल व्यावसायिक

जांच में यह बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है कि इस बिल्डिंग का नक्शा (मैप) केवल रहने (आवासीय उपयोग) के लिए पास कराया गया था। लेकिन नियमों को ताक पर रखकर इस रिहायशी बिल्डिंग का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। इतना ही नहीं, साल 2016 में इस अवैध निर्माण के खिलाफ ध्वस्तीकरण (बिल्डिंग गिराने) का आदेश जारी हुआ था, लेकिन तत्कालीन विहित प्राधिकारी दुर्गेश श्रीवास्तव ने उस आदेश को ही निरस्त कर दिया था, जिसके कारण यह अवैध कमर्शियल एक्टिविटी सालों से चलती रही।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी से गई 15 जानें

हादसे वाली इमारत में सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई गई थीं। पूरी बिल्डिंग में धुआं बाहर निकालने का कोई वेंटिलेशन सिस्टम नहीं था, जिसके कारण आग लगते ही कमरों में जहरीला धुआं भर गया और ज्यादातर मौतें दम घुटने से हुईं। बिल्डिंग में लगे एसी के आउटर यूनिट और बिजली के उपकरण भी बेहद असुरक्षित तरीके से लगाए गए थे। हालात इतने खराब थे कि एनडीआरएफ (NDRF) और दमकल की टीमों को रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान कंक्रीट की दीवारें काटकर अंदर घुसना पड़ा। शासन अब इस रिपोर्ट के आधार पर दोषी अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है।

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