KNEWS DESK- सुबह और शाम दीपक जलाने की परंपरा केवल एक धार्मिक रीति नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक शांति से भी जुड़ी मानी जाती है।

सनातन धर्म में पूजा-पाठ के दौरान दीपक जलाने की परंपरा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि दीपक केवल एक ज्योति नहीं, बल्कि ज्ञान, सकारात्मक ऊर्जा और ईश्वर की कृपा का प्रतीक है। घर के मंदिर में प्रतिदिन दीपक जलाने से वातावरण पवित्र बना रहता है और परिवार में सुख-शांति का वास होता है। हालांकि, धार्मिक ग्रंथों में दीपक जलाने के लिए कुछ विशेष नियम और समय भी बताए गए हैं, जिनका पालन करना शुभ माना जाता है।
कब जलाना चाहिए पूजा घर में दीपक?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर के मंदिर में दिन में दो बार दीपक जलाना सबसे शुभ माना जाता है। पहला समय प्रातःकाल यानी सूर्योदय के आसपास और दूसरा समय संध्या काल यानी सूर्यास्त के बाद होता है।
सुबह दीपक जलाने से दिन की शुरुआत सकारात्मकता और उत्साह के साथ होती है, जबकि शाम के समय दीपक जलाने से घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-समृद्धि का आगमन होता है। विशेष रूप से संध्या काल को देवी-देवताओं की आराधना और दीपदान के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
कौन-सा दीपक सबसे शुभ माना जाता है?
धार्मिक ग्रंथों में गाय के शुद्ध घी का दीपक सबसे श्रेष्ठ माना गया है। मान्यता है कि घी का दीपक जलाने से भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
इसके अलावा—
- सरसों के तेल का दीपक शनि देव, हनुमान जी और पितरों की पूजा में शुभ माना जाता है।
- तिल के तेल का दीपक भी कई धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयोग किया जाता है।
- पूजा के लिए हमेशा शुद्ध और स्वच्छ घी या तेल का ही इस्तेमाल करना चाहिए।
दीपक जलाते समय इन नियमों का रखें ध्यान
- दीपक को हमेशा साफ और पवित्र स्थान पर रखें।
- दीपक जलाने से पहले भगवान का ध्यान करें और मन को शांत रखें।
- कोशिश करें कि पूजा समाप्त होने तक दीपक जलता रहे।
- रुई की बत्ती का प्रयोग करना शुभ माना जाता है।
- दीपक को फूंक मारकर नहीं बुझाना चाहिए।
- यदि किसी कारणवश दीपक बुझाना आवश्यक हो, तो उसे किसी फूल या अन्य कोमल वस्तु की सहायता से शांत करना बेहतर माना जाता है।
किस दिशा में रखना चाहिए दीपक?
वास्तु शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा घर में दीपक को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है।
- पूर्व दिशा में दीपक रखने से ज्ञान, ऊर्जा और सकारात्मकता बढ़ती है।
- उत्तर दिशा धन, समृद्धि और सुख-संपन्नता का प्रतीक मानी जाती है।
इसलिए पूजा घर की व्यवस्था करते समय दीपक की दिशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
क्या है दीपक जलाने का आध्यात्मिक महत्व?
धार्मिक मान्यता है कि दीपक की लौ अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान और आत्मविश्वास का प्रकाश फैलाती है। यही कारण है कि हर शुभ कार्य, पूजा या धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत दीप प्रज्वलन से की जाती है। नियमित रूप से श्रद्धा और नियमों के साथ दीपक जलाने से मन को शांति मिलती है और घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है।