डिजिटल डेस्क- राजधानी पटना में हाल ही में हुए चर्चित ‘खान सर प्रकरण’ के बाद बिहार सरकार राज्य के कोचिंग उद्योग और समानांतर शिक्षा व्यवस्था को लेकर पूरी तरह सक्रिय और सख्त रुख में नजर आ रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व और शिक्षा विभाग के समन्वय से सरकार कोचिंग सेंटरों पर कड़ा नियंत्रण रखने और राज्य की शिक्षा व्यवस्था में कड़ा अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए एक नई और व्यापक नियमावली (गाइडलाइंस) तैयार करने जा रही है। इस नए कानून के तहत अब बिहार में किसी भी कोचिंग संस्थान को संचालित करने के लिए संबंधित जिले के जिलाधिकारी (डीएम) से पूर्व अनुमति और लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।
स्कूल और कॉलेज के समय कोचिंग संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध
सरकार की ओर से अधिकारियों को स्पष्ट और कड़े संकेत दिए गए हैं कि राज्य में स्कूल और कॉलेज के मुख्य शैक्षणिक घंटों (टीचिंग आवर्स) के दौरान किसी भी कोचिंग सेंटर को संचालित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस ऐतिहासिक फैसले का मुख्य उद्देश्य छात्रों की सरकारी और निजी स्कूलों-कॉलेजों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना है। अक्सर देखा जाता है कि छात्र स्कूल की कक्षाएं छोड़कर कोचिंग सेंटरों का रुख कर लेते हैं, जिससे मुख्य शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है। नई नियमावली लागू होने के बाद कोचिंग संस्थानों को सुबह या देर शाम ही कक्षाएं संचालित करने का विकल्प मिलेगा।
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और शिक्षा मंत्री ने दिए नीति तैयार करने के निर्देश
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक कर कोचिंग संस्थानों के लिए एक सख्त और व्यापक नीति का मसौदा तैयार करने का निर्देश दिया है।
क्या-क्या बदलेगा नई व्यवस्था में?
- अनिवार्य पंजीकरण: प्रत्येक छोटे-बड़े कोचिंग संस्थान का सरकारी पोर्टल पर निबंधन (रजिस्ट्रेशन) जरूरी होगा।
- छात्रों का रिकॉर्ड: संस्थान में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं का पूरा डेटाबेस और उपस्थिति का रिकॉर्ड पारदर्शी रखना होगा।
- बुनियादी सुविधाएं और एनओसी: कोचिंग सेंटरों में पार्किंग की पर्याप्त जगह, छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय, शुद्ध पेयजल व्यवस्था और सबसे महत्वपूर्ण अग्निशमन विभाग (Fire Department) की एनओसी होना अनिवार्य होगा।
सरकार ने साफ किया है कि सुरक्षा मानकों और नियमों की अनदेखी करने वाले कोचिंग संस्थानों के खिलाफ न सिर्फ भारी जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि उनके संस्थान को हमेशा के लिए सील भी किया जा सकता है।
डिप्टी सीएम ने ‘X’ पर किया पोस्ट, कहा— ‘प्राथमिकता सिर्फ अनुशासन और पारदर्शिता’
इस बीच, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर एक महत्वपूर्ण पोस्ट साझा करते हुए सरकार के इरादे स्पष्ट कर दिए हैं। उन्होंने लिखा कि बिहार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता राज्य की शिक्षा व्यवस्था में कड़ा अनुशासन, पूर्ण पारदर्शिता और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित कराना है। छात्रों के भविष्य और उनके हितों की रक्षा के लिए सरकार बिना किसी दबाव के आवश्यक और कड़े कदम उठाने जा रही है। बिहार के राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में सरकार के इस नीतिगत फैसले को राज्य के विशाल कोचिंग उद्योग के लिए एक ‘टर्निंग पॉइंट’ माना जा रहा है। पटना को देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों का एक बड़ा हब माना जाता है। ऐसे में नई नियमावली और डीएम की अनुमति की अनिवार्यता लागू होने के बाद बिहार में चल रहे हजारों कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर सीधे तौर पर लगाम कसेगी, जिससे इस क्षेत्र में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।