रांची: अस्पताल के बेड से देवेंद्र महतो ने सिविल सर्जन को लिखा पत्र, धरना स्थल लौटने की मांगी अनुमति

KNEWS DESK- झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। इस बीच आंदोलन का नेतृत्व कर रहे JLKM नेता देवेंद्र महतो ने अस्पताल के बेड से रांची के सिविल सर्जन को पत्र लिखकर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम स्थित धरना स्थल पर लौटने की अनुमति मांगी है। महतो पिछले 11 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और फिलहाल उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद सदर अस्पताल में इलाज चल रहा है।

देवेंद्र महतो ने अपने पत्र में कहा है कि भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ हजारों छात्र अपने अधिकारों और भविष्य के लिए आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में वह खुद को इस आंदोलन से अलग नहीं रखना चाहते। उन्होंने धरना स्थल पर वापस जाने की अनुमति देने का आग्रह किया है, ताकि वह छात्रों के बीच रहकर उनके संघर्ष में शामिल हो सकें।

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महतो ने सोशल मीडिया पर भी अपनी बात रखते हुए कहा कि भले ही उनका शरीर अस्पताल के बेड पर इलाज करा रहा है, लेकिन उनकी आत्मा सत्याग्रह स्थल पर है। उन्होंने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र और युवा अपने भविष्य के लिए न्यायपूर्ण संघर्ष कर रहे हैं। उनके मुताबिक, यह आंदोलन केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि उनके लिए जिम्मेदारी और उम्मीद की किरण भी है।

19 दिनों से आंदोलन कर रहे छात्र

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं के आयोजन और प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन पिछले 19 दिनों से चल रहा है। प्रदर्शनकारी छात्र भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, कथित गड़बड़ियों की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई समेत कई मांगें उठा रहे हैं।

इसी आंदोलन के समर्थन में देवेंद्र महतो ने भूख हड़ताल शुरू की थी। लगातार उपवास के कारण उनकी तबीयत प्रभावित हुई, जिसके बाद उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान भी उन्होंने आंदोलन से जुड़े रहने की इच्छा जताई है।

रघुबर दास ने सरकार को दिया एक हफ्ते का अल्टीमेटम

इस बीच झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता रघुबर दास भी बुधवार को प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मिलने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचे। उन्होंने छात्रों से बातचीत की और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए।

रघुबर दास ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार से मामले की CBI जांच की सिफारिश करने की मांग की। उन्होंने सरकार को इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया है। दास ने कहा कि यदि सरकार तय समय सीमा के भीतर भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की CBI जांच की सिफारिश नहीं करती है, तो वह खुद भूख हड़ताल पर बैठेंगे।

छात्रों को संबोधित करते हुए दास ने कहा कि अगर राज्य सरकार एक सप्ताह के भीतर भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों की CBI जांच की सिफारिश करने में विफल रहती है, तो उन्हें आंदोलन स्थल पर भूख हड़ताल करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

अब देवेंद्र महतो की ओर से अस्पताल से धरना स्थल लौटने की अनुमति मांगने के बाद आंदोलन को लेकर प्रशासन के अगले कदम पर नजर है। एक तरफ छात्र लगातार अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ महतो की तबीयत और उनकी भूख हड़ताल ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। ऐसे में सरकार और प्रशासन की ओर से इस आंदोलन को लेकर क्या रुख अपनाया जाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।