इस साल 15 जून को है सोमवती अमावस्या? जानिए इस दिन पीपल की 108 परिक्रमा करने का रहस्य

KNEWS DESK- हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है, लेकिन जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है तो उसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। साल 2026 में सोमवती अमावस्या का पावन व्रत 15 जून, सोमवार को रखा जाएगा। यह दिन विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद शुभ माना जाता है, जो अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए व्रत और पूजा करती हैं।

कब है सोमवती अमावस्या 2026?

वैदिक पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिकमास की अमावस्या तिथि 14 जून 2026 को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट पर शुरू होगी और 15 जून को सुबह 8 बजकर 23 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि 15 जून को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि विद्यमान रहेगी और उस दिन सोमवार भी है, इसलिए सोमवती अमावस्या का व्रत 15 जून को रखा जाएगा।

क्यों की जाती है पीपल की 108 परिक्रमा?

सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा और उसकी 108 परिक्रमा करने की परंपरा सदियों पुरानी है। धार्मिक मान्यता है कि पीपल के वृक्ष में त्रिदेवों का वास होता है। इसकी जड़ों में ब्रह्मा, तने में विष्णु और ऊपरी भाग में भगवान शिव निवास करते हैं। ऐसे में पीपल की पूजा करने से एक साथ तीनों देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

इस दिन महिलाएं पीपल के वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत लपेटते हुए 108 परिक्रमा करती हैं और परिवार की खुशहाली, पति की लंबी उम्र तथा सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। माना जाता है कि इस उपाय से दांपत्य जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सौभाग्य में वृद्धि होती है।

108 परिक्रमा के पीछे क्या है मान्यता?

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक पतिव्रता स्त्री ने अपने मृत पति को पुनर्जीवन दिलाने के लिए श्रद्धा और विश्वास के साथ पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा की थी। उसकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर देवताओं ने उसके पति को जीवनदान दिया। तभी से सोमवती अमावस्या पर पीपल की 108 परिक्रमा करने की परंपरा प्रचलित मानी जाती है।

धार्मिक ग्रंथों में 108 अंक को भी अत्यंत पवित्र माना गया है। यह संख्या आध्यात्मिक ऊर्जा, पूर्णता और दिव्य शक्ति का प्रतीक मानी जाती है।

क्या है इस दिन का धार्मिक महत्व?

सोमवती अमावस्या को स्नान, दान, जप, तप और पूजा-पाठ के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहे वर की कामना से पूजा-अर्चना करती हैं।

मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया सोमवती अमावस्या का व्रत जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और पारिवारिक खुशहाली लेकर आता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *