KNEWS DESK – पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सियासी हलचल तेज होती नजर आ रही है। इसी बीच पार्टी की बैठक में बड़ी संख्या में विधायकों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है। इस घटनाक्रम के बीच तृणमूल सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संबोधित किया।
अपने संबोधन में ममता बनर्जी ने दावा किया कि उनकी पार्टी के विधायकों और नेताओं पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जनप्रतिनिधियों को विभिन्न एजेंसियों का डर दिखाकर राजनीतिक रूप से प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। ममता ने कहा कि उन्हें कई विधायकों ने व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर ऐसी शिकायतें दी हैं।
तृणमूल प्रमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कुछ लोगों को डरा-धमकाकर या राजनीतिक दबाव बनाकर पार्टी को कमजोर नहीं किया जा सकता। उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस पहले से अधिक मजबूती के साथ खड़ी है और भविष्य में भी अपनी राजनीतिक लड़ाई जारी रखेगी।
इस दौरान ममता बनर्जी ने चुनावी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में मतगणना एवं पुनर्गणना को लेकर अपनी आपत्तियां दोहराईं। उन्होंने कहा कि कई सीटों पर परिणामों को लेकर उनकी पार्टी के पास गंभीर सवाल हैं और वे इन मुद्दों को लगातार उठाती रहेंगी।
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उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ कथित कार्रवाई, कार्यालयों को नुकसान पहुंचाने और राजनीतिक गतिविधियों में बाधा डालने के आरोप भी लगाए। ममता ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
अपने संबोधन में उन्होंने छात्रों और युवाओं का भी जिक्र किया और सामाजिक तथा लोकतांत्रिक मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी की अपील की। ममता ने कहा कि युवाओं की भूमिका लोकतंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण होती है और उन्हें अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए।
वहीं, हाल ही में हुई एक राजनीतिक हिंसा की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने पार्टी नेताओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए और सभी राजनीतिक दलों को शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने की दिशा में काम करना चाहिए।
राज्य की राजनीति में जारी इस उथल-पुथल के बीच ममता बनर्जी का यह संदेश पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए एकजुटता और संघर्ष का संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस मुद्दे पर और अधिक हलचल देखने को मिल सकती है।