KNEWS DESK- भारतीय क्रिकेट में पिछले दो दशकों में टैलेंट की खोज का दायरा तेजी से बढ़ा है। छोटे शहरों और गांवों से निकलकर कई खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचे हैं। इस बदलाव में आईपीएल फ्रेंचाइज़ियों की स्काउटिंग सिस्टम की बड़ी भूमिका रही है। इसी कड़ी में राजस्थान रॉयल्स ने एक और युवा सितारे वैभव सूर्यवंशी को खोजकर सुर्खियां बटोरीं, जिनकी पहचान कराने में अहम भूमिका निभाई पूर्व क्रिकेटर और स्काउट समर कादरी ने।
समर कादरी मूल रूप से पटना के रहने वाले हैं और बिहार क्रिकेट से लंबे समय तक जुड़े रहे हैं। वह एक पूर्व लेग स्पिनर हैं, जिन्होंने 2009 से 2021 तक झारखंड और बिहार की टीमों का प्रतिनिधित्व किया।
अपने फर्स्ट क्लास करियर में समर कादरी ने 45 मैचों में 157 विकेट हासिल किए। इसके अलावा उन्होंने 18 लिस्ट-ए मैचों में 19 विकेट और 17 टी20 मैचों में 14 विकेट लिए। क्रिकेट से संन्यास के बाद उन्होंने स्काउटिंग की दुनिया में कदम रखा और पिछले कुछ वर्षों से राजस्थान रॉयल्स के साथ जुड़े हुए हैं।
समर कादरी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने पहली बार वैभव सूर्यवंशी के बारे में तब सुना जब वह सिर्फ 11-12 साल के थे। इसके बाद पटना के एक स्थानीय मैच में दोनों का सामना हुआ, जहां वैभव ने लगभग 50 गेंदों में शानदार शतक जड़ दिया।
इस मैच में वैभव ने न सिर्फ बेहतरीन बल्लेबाजी की, बल्कि समर कादरी की गेंदों पर भी जमकर रन बनाए। इसी प्रदर्शन के बाद कादरी को एहसास हो गया कि यह खिलाड़ी सामान्य नहीं है।
समर कादरी ने बताया कि जब वैभव को राजस्थान रॉयल्स के ट्रायल्स में बुलाया गया, तो उन्होंने पहले ही ओवर में अपनी प्रतिभा का परिचय दे दिया। ट्रायल्स की शुरुआती 3 गेंदों पर ही वैभव ने लगातार 3 छक्के जड़ दिए, जिससे वहां मौजूद सभी कोच और स्काउट्स हैरान रह गए। इसके बाद उन्हें तुरंत चयन प्रक्रिया में शामिल किया गया और धीरे-धीरे वह राजस्थान रॉयल्स की योजना का हिस्सा बन गए।
ट्रायल्स और घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के चलते वैभव सूर्यवंशी को बिहार की रणजी टीम में भी जगह मिली। इसके बाद राजस्थान रॉयल्स के हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर जुबिन भरूचा को भी उनके बारे में जानकारी मिली और उन्हें आगे मौका दिया गया। इसके बाद वैभव ने आईपीएल में अपने प्रदर्शन से सभी को चौंका दिया और बेहद कम उम्र में ही क्रिकेट जगत में अपनी अलग पहचान बना ली।
समर कादरी का यह योगदान भारतीय क्रिकेट में स्काउटिंग सिस्टम की अहमियत को भी दर्शाता है। छोटे शहरों से निकलकर खिलाड़ियों को पहचानने और सही मंच तक पहुंचाने में उनकी भूमिका लगातार अहम होती जा रही है। वैभव सूर्यवंशी की सफलता इस बात का उदाहरण है कि सही समय पर सही पहचान किसी भी खिलाड़ी की किस्मत बदल सकती है।