KNEWS DESK- बिहार के पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल स्थित उमानाथ गंगा घाट पर बुधवार सुबह एक भीषण नाव हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। दियारा क्षेत्र में परवल तोड़ने जा रहे किसानों से भरी नाव गंगा नदी में पलट गई, जिसमें अब तक 7 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
हादसे में कुल 14 से 15 लोग नाव पर सवार थे, जिनमें से कई लोगों को स्थानीय नाविकों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि कुछ लोग तैरकर किनारे पहुंचने में सफल रहे। मृतकों में 1 पुरुष और 6 महिलाएं शामिल हैं, जो सभी बिंद टोली गांव के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, बिंद टोली के किसान रोज की तरह बुधवार सुबह भी दियारा इलाके में खेती और मजदूरी के लिए गंगा पार जा रहे थे। जैसे ही नाव नदी के बीच पहुंची, अचानक तेज हवा और पानी के बहाव के कारण नाव असंतुलित हो गई और पलट गई।
नाव पलटते ही उसमें सवार लोगों में चीख-पुकार मच गई। कई लोग गहरे पानी में डूबने लगे। आसपास मौजूद नाविकों ने तुरंत अपनी नावों से बचाव कार्य शुरू किया और कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और आपदा राहत दल मौके पर पहुंचा। SDRF की टीम ने मोटरबोट और गोताखोरों की मदद से सर्च ऑपरेशन शुरू किया। रेस्क्यू अभियान के दौरान एक महिला और एक युवक का शव बरामद किया गया, जबकि अन्य की तलाश जारी है। प्रशासन ने अब तक 7 मौतों की पुष्टि की है और बताया है कि बाकी लापता लोगों की खोज लगातार की जा रही है।
हादसे की खबर फैलते ही उमानाथ गंगा घाट पर भारी भीड़ जमा हो गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बिंद टोली गांव में हर घर में मातम का माहौल है और लोग अपनों के लौटने की उम्मीद में घंटों गंगा किनारे खड़े रहे।
बाढ़ थानाध्यक्ष ब्रजकिशोर सिंह, एसडीएम गरिमा लोहिया, सीडीपीओ रामाकृष्णा और अंचलाधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य का जायजा लिया।
अधिकारियों ने बताया कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। शुरुआती जांच में तेज हवा और क्षमता से अधिक लोगों का नाव पर सवार होना दुर्घटना की मुख्य वजह मानी जा रही है।
स्थानीय लोगों ने इस हादसे के बाद दियारा क्षेत्र में सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि रोजी-रोटी के लिए जान जोखिम में डालकर नदी पार करना उनकी मजबूरी है और सरकार को स्थायी समाधान जैसे पुल या सुरक्षित नाव व्यवस्था करनी चाहिए। यह दर्दनाक हादसा एक बार फिर गंगा किनारे बसे गांवों में बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था की कमी को उजागर करता है।