KNEWS DESK-देशभर में भीषण गर्मी और हीटवेव का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। ऐसे मौसम में सबसे ज्यादा खतरा छोटे बच्चों और नवजातों को होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों का शरीर बहुत जल्दी गर्म हो जाता है और उनमें पसीना भी कम निकलता है, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा तेजी से बढ़ जाता है।

डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी में थोड़ी-सी लापरवाही भी बच्चों की सेहत पर भारी पड़ सकती है। इसलिए माता-पिता को बच्चों के खानपान, कपड़ों और रोजमर्रा की देखभाल पर खास ध्यान देने की जरूरत है।
बच्चों में हीट स्ट्रोक क्यों होता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नेशनल हेल्थ मिशन के मुताबिक, छोटे बच्चों का शरीर तापमान को नियंत्रित करने में कमजोर होता है। तेज गर्मी में उनका शरीर जल्दी गर्म हो जाता है, जबकि पसीना कम निकलता है। इससे शरीर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है और हीट स्ट्रोक की स्थिति बन सकती है। खासकर 5 से 6 साल तक के बच्चों को तेज धूप और गर्म हवाओं से बचाकर रखना बेहद जरूरी माना जाता है।
बच्चों को हीट स्ट्रोक से कैसे बचाएं?
- बच्चों को ठंडी और हवादार जगह पर रखें
- तेज धूप में बाहर न निकलने दें
- बंद कमरे या कार में अकेला न छोड़ें
- समय-समय पर पानी या दूध पिलाते रहें
- शरीर का तापमान चेक करते रहें
- बच्चों की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें
डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों के शरीर में पानी की कमी नहीं होने देना सबसे जरूरी है।
गर्मियों में बच्चों को कैसे कपड़े पहनाएं?
गर्मी के मौसम में बच्चों को हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनाने चाहिए। सूती कपड़े पसीना सोख लेते हैं और शरीर को ठंडक देते हैं। ज्यादा मोटे या टाइट कपड़े पहनाने से शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती। इसके अलावा बच्चों को ठंडे पानी से नहलाना और गीले कपड़े से शरीर साफ करना भी फायदेमंद माना जाता है।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
अगर बच्चा अचानक चिड़चिड़ा हो जाए, ज्यादा नींद आए, उल्टी करे, तेज बुखार हो या सांस लेने में परेशानी महसूस करे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। ये हीट स्ट्रोक के गंभीर संकेत हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता अक्सर इन शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में गंभीर समस्या बन सकते हैं। इसलिए गर्मी के मौसम में बच्चों की सेहत को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है।