KNEWS DESK- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में सचिवालय में राजस्थान कैबिनेट और मंत्रिपरिषद की अहम बैठक आयोजित हुई। करीब तीन महीने बाद हुई इस बैठक में राज्य के विकास, प्रशासनिक सुधार और जनकल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में लिए गए फैसलों को राज्य के भविष्य की दिशा तय करने वाले कदम माना जा रहा है।
बैठक में सबसे बड़ा फैसला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट पॉलिसी को लेकर लिया गया, जिसे कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इस पॉलिसी के तहत राज्य में औद्योगिक विकास को नई गति देने की योजना बनाई गई है। मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने बताया कि सरकार टैलेंट इकोनॉमी को बढ़ावा देने की दिशा में बड़े कदम उठा रही है और अगले 25 वर्षों को ध्यान में रखते हुए नीतियां तैयार की जा रही हैं।
नई नीति के तहत ऑटो-रिन्यूअल सिस्टम लागू किया जाएगा, जिससे उद्योगों को मंजूरी प्रक्रिया में आसानी होगी। इसके अलावा निजी कंपनियों को अपने इंडस्ट्रियल पार्क स्थापित करने की अनुमति दी जाएगी, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
कैबिनेट बैठक में प्रशासनिक सुधारों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। सरकारी कर्मचारियों की पेंशन प्रक्रिया को सरल बनाने का निर्णय लिया गया है। विकलांगता प्रमाण पत्र को अब एक बार जारी होने के बाद मान्य माना जाएगा, जिससे प्रक्रियात्मक जटिलताएं कम होंगी। इसके साथ ही परिवार पेंशन के नियमों में भी सरलीकरण किया गया है, जिसमें एक राजपत्रित अधिकारी के हस्ताक्षर को पर्याप्त माना जाएगा।
बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एग्रीकोला मेडल मिलने पर कैबिनेट द्वारा शुभकामनाएं भी दी गईं। इसे देश के लिए गर्व का क्षण बताया गया।
राज्य सरकार ने जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” शुरू करने का भी निर्णय लिया है। इस अभियान की शुरुआत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भरतपुर से करेंगे। मंत्री सुरेश रावत ने बताया कि इस अभियान को आम जनता से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे और उत्कृष्ट कार्य करने वाले जल योद्धाओं को सम्मानित किया जाएगा।
ऊर्जा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए जैसलमेर और बाड़मेर जिलों में भूमि आवंटन को मंजूरी दी गई है। यह कदम राज्य में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
इसके अलावा “विकसित वार्ड, विकसित ग्राम” अभियान पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मंत्री हीरालाल नागर ने बताया कि सभी ग्राम पंचायतों और शहरी वार्डों से फीडबैक लिया गया है और 2030 तक का विकास डेटाबेस तैयार किया गया है। गांव और शहरों की जरूरतों का विस्तृत डेटा तैयार कर लिया गया है, जिससे योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा।
कैबिनेट बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि मंत्री अपने-अपने प्रभार वाले जिलों का नियमित दौरा करेंगे और पानी व बिजली आपूर्ति की स्थिति पर विशेष ध्यान देंगे। सरकार का फोकस अब जमीनी स्तर पर विकास कार्यों को तेज करने पर रहेगा।
कुल मिलाकर राजस्थान कैबिनेट की यह बैठक कई बड़े और दूरगामी फैसलों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिनका असर आने वाले समय में राज्य के विकास और प्रशासनिक व्यवस्था पर साफ दिखाई देगा।