सुषमा खर्कवाल को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, आदेश न मानने पर वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज

KNEWS DESK – Sushma Kharkwal को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने मेयर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों को सीज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह सख्त कदम अपने आदेश का पालन न किए जाने पर उठाया है।

पूरा मामला लखनऊ नगर निगम के वार्ड संख्या-73 फैजुल्लागंज से जुड़ा है। इस वार्ड में पार्षद पद को लेकर चुनावी विवाद चल रहा था। बीते साल 19 दिसंबर को चुनाव न्यायाधिकरण ने पार्षद प्रदीप शुक्ला का निर्वाचन रद्द करते हुए Lalit Tiwari को निर्वाचित घोषित किया था। लेकिन फैसले के करीब पांच महीने बाद भी उन्हें शपथ नहीं दिलाई गई।

इसी को लेकर ललित तिवारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पूर्व में दिए गए आदेशों का पालन अब तक नहीं हुआ है। इसके बाद जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस कमर हसन रिजवी की खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए मेयर के अधिकार सीज करने का आदेश पारित कर दिया।

अदालत ने अपने आदेश में साफ कहा कि जब तक निर्वाचित पार्षद को शपथ नहीं दिलाई जाती, तब तक मेयर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार बहाल नहीं किए जाएंगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती।

मामले में मेयर पक्ष ने पहले हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट से राहत पाने की कोशिश की थी, लेकिन दोनों जगह उन्हें कोई राहत नहीं मिली। इसके बावजूद आदेश का अनुपालन न होने पर अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने याचिकाकर्ता की ओर से पक्ष रखा। वहीं नगर निगम की तरफ से दलील दी गई कि फैसले के खिलाफ प्रथम अपील लंबित है और यदि अपील मंजूर हो जाती है तो स्थिति बदल सकती है। हालांकि अदालत ने इस तर्क को पर्याप्त नहीं माना।

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद लखनऊ नगर निगम के कामकाज पर असर पड़ सकता है। वित्तीय मंजूरियों, प्रशासनिक फैसलों और महत्वपूर्ण फाइलों की प्रक्रिया प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है। बता दें कि सुषमा खर्कवाल मई 2023 से लखनऊ की मेयर हैं और Bharatiya Janata Party की वरिष्ठ नेता मानी जाती हैं।

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