KNEWS DESK- देश में आवारा कुत्तों को लेकर चल रही कानूनी बहस पर आज सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि आवारा कुत्तों को हटाने का 2025 का पुराना आदेश ही लागू रहेगा और इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही कोर्ट ने पशु कल्याण से जुड़े सभी याचिकाकर्ताओं और एनिमल वेलफेयर बोर्ड के आवेदन खारिज कर दिए।
यह फैसला जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने सुनाया। कोर्ट ने अपने आदेश में दोहराया कि आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर पहले दिए गए निर्देशों का पालन ही सभी राज्यों और संबंधित एजेंसियों को करना होगा।
इस मुद्दे पर पिछले कई महीनों से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। 29 जनवरी को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और सभी पक्षों से एक सप्ताह के भीतर लिखित दलीलें जमा करने को कहा गया था।
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब देश के अलग-अलग हिस्सों से आवारा कुत्तों के हमलों और रेबीज के बढ़ते मामलों की खबरें सामने आईं। इसके बाद कई जनहित याचिकाएं दायर कर मांग की गई कि सड़कों पर बढ़ती आवारा कुत्तों की संख्या पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
पिछले साल अगस्त में जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर महादेवन की बेंच ने दिल्ली-एनसीआर के अधिकारियों को निर्देश दिया था कि सड़कों से आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम में भेजा जाए। कोर्ट ने यह भी कहा था कि नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को दोबारा सड़कों पर नहीं छोड़ा जाएगा।
इसके अलावा, इस आदेश का पालन न करने या बाधा डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी।
नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश का दायरा बढ़ाते हुए सभी राज्यों और नेशनल हाईवे अथॉरिटी को निर्देश दिया था कि स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और खेल मैदानों जैसी सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए।
साथ ही, शैक्षणिक और स्वास्थ्य संस्थानों के चारों ओर बाउंड्री बनाने के निर्देश भी दिए गए थे ताकि कुत्ते अंदर न आ सकें और उन्हें दोबारा उन इलाकों में छोड़ा न जाए।
इस पूरे मामले ने देश में एक बड़ी बहस को जन्म दिया है। एक तरफ लोग नागरिक सुरक्षा और बढ़ते कुत्ता हमलों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पशु अधिकार कार्यकर्ता क्रूरता से बचाव और वैज्ञानिक तरीके से नसबंदी और देखभाल की वकालत कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आज के फैसले के बाद अब यह साफ हो गया है कि फिलहाल 2025 का आदेश ही लागू रहेगा और देशभर में आवारा कुत्तों के प्रबंधन की नीति इसी आधार पर आगे बढ़ेगी।