रिटायर प्रोफेसर से बना NEET पेपर लीक का मास्टरमाइंड! जानिए कौन है पीवी कुलकर्णी?

KNEWS DESK – NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं. इस पूरे मामले में अब सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम की हो रही है, वो है रिटायर्ड प्रोफेसर PV Kulkarni. CBI ने कुलकर्णी को इस पेपर लीक रैकेट का मास्टरमाइंड बताया है. जांच एजेंसी का दावा है कि उसने अपने नेटवर्क के जरिए छात्रों तक लीक पेपर पहुंचाया और उन्हें सवाल-जवाब तक रटवाए गए.

CBI अब तक इस केस में 9 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. शनिवार को एजेंसी ने कुलकर्णी और उसकी कथित सहयोगी Manisha Mandhare को दिल्ली की Rouse Avenue Court में पेश किया. सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों आरोपियों को 10 दिनों की CBI कस्टडी में भेज दिया.

जांच के मुताबिक, कुलकर्णी महाराष्ट्र के लातूर का रहने वाला है और चार साल पहले रिटायर हुआ था. वह लंबे समय तक दयानंद शिक्षण संस्था से जुड़ा रहा और बाद में पुणे शिफ्ट हो गया. CBI का कहना है कि कुलकर्णी NTA से जुड़े परीक्षा प्रोसेस का हिस्सा था और उसी दौरान उसने पेपर लीक नेटवर्क तैयार किया. एजेंसी को शक है कि उसका संबंध पुराने पेपर लीक मामलों से भी हो सकता है.

CBI जांच में यह भी सामने आया है कि कुलकर्णी और मनीषा मंधारे ने महाराष्ट्र के कई शहरों में छात्रों तक पहुंच बनाने के लिए एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेमिनार आयोजित किए जाते थे और पुराने छात्रों के जरिए मेडिकल अभ्यर्थियों से संपर्क साधा जाता था. जांच एजेंसियों को शक है कि कोचिंग संस्थानों और मॉक टेस्ट के डेटा का इस्तेमाल कमजोर छात्रों की पहचान के लिए किया गया.

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब एक अभिभावक ने शिकायत दर्ज कराई. जांच के दौरान पुणे पुलिस को कुछ संदिग्ध ट्रांजैक्शन मिले, जिनमें परीक्षा वाले दिन मनीषा वाघमारे के खाते में करीब 10 लाख रुपये ट्रांसफर होने की बात सामने आई. वहीं कई छात्रों की ओर से छोटे-छोटे भुगतान किए जाने की भी जानकारी मिली. इसके बाद मामला CBI तक पहुंचा और जांच तेज कर दी गई.

उधर पुणे के प्रतिष्ठित Modern College की वरिष्ठ प्रोफेसर मनीषा मंधारे की गिरफ्तारी के बाद कॉलेज प्रशासन भी चर्चा में आ गया है. कॉलेज की प्रिंसिपल Dr. Nivedita Ekbote ने कहा कि परीक्षा से जुड़े काम सीधे NTA और संबंधित प्रोफेसर के बीच होते हैं और कॉलेज की इसमें कोई भूमिका नहीं होती. उन्होंने बताया कि मनीषा पिछले 24 वर्षों से कॉलेज में कार्यरत थीं और उनके खिलाफ पहले कभी कोई शिकायत नहीं मिली थी.

फिलहाल CBI पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है. एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल थे और क्या पुराने पेपर लीक मामलों से भी इसका कोई संबंध है.


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