डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश की राजनीति में रविवार का दिन बेहद अहम रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दूसरे कार्यकाल का महत्वपूर्ण मंत्रिमंडल विस्तार करते हुए 6 नए मंत्रियों को अपनी टीम में शामिल किया है। राजभवन में आयोजित एक विशेष समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सभी नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हुए इस विस्तार को भाजपा की एक बड़ी रणनीतिक घेराबंदी के तौर पर देखा जा रहा है। इस विस्तार में सबसे चर्चित नाम मनोज पांडेय का रहा, जो समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं। अवध और पूर्वांचल के ब्राह्मण समाज में मजबूत पकड़ रखने वाले मनोज पांडेय को कैबिनेट में शामिल कर भाजपा ने एक बड़ा दांव चला है। वहीं, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी की सरकार में वापसी हुई है। जाटलैंड की राजनीति में माहिर माने जाने वाले चौधरी को शामिल कर पश्चिमी यूपी में संगठन और सरकार के बीच तालमेल को और मजबूत करने की कोशिश की गई है।
पिछड़ा और दलित वर्ग को दी गई तरजीह
योगी सरकार ने इस विस्तार के जरिए सामाजिक संतुलन साधने का भी पूरा प्रयास किया है। हंसराज विश्वकर्मा, जो पिछले 34 वर्षों से पिछड़ों की राजनीति कर रहे हैं और वाराणसी क्षेत्र के भाजपा जिलाध्यक्ष रह चुके हैं, उन्हें मंत्री बनाकर ओबीसी वोट बैंक को संदेश दिया गया है। साथ ही, कृष्णा पासवान के रूप में एक मजबूत दलित चेहरे को जगह मिली है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से लेकर चार बार की विधायक तक का सफर तय करने वाली कृष्णा पासवान की दलित मतदाताओं के बीच गहरी पैठ मानी जाती है।
क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर विशेष ध्यान
मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय संतुलन का भी ख्याल रखा गया है। कन्नौज की तिर्वा सीट से विधायक कैलाश सिंह राजपूत ने मंत्री पद की शपथ ली है, जो लोधी समाज के बड़े नेता माने जाते हैं। उनके साथ ही अजीत पाल और सुरेंद्र दिलेर को भी टीम योगी में स्थान दिया गया है। इन नियुक्तियों के माध्यम से भाजपा ने ब्रज, बुंदेलखंड और रुहेलखंड जैसे क्षेत्रों में अपने आधार को और व्यापक बनाने का प्रयास किया है।
दो मंत्रियों का प्रमोशन और भविष्य की रणनीति
नए चेहरों को शामिल करने के साथ-साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दो मौजूदा राज्यमंत्रियों के बेहतर कार्य प्रदर्शन को देखते हुए उनका प्रमोशन भी किया है। शनिवार शाम को ही सीएम योगी ने राज्यपाल से मुलाकात कर अंतिम सूची सौंप दी थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस फेरबदल से न केवल सरकार के कामकाज में तेजी आएगी, बल्कि उन कद्दावर नेताओं को भी संतुष्ट किया गया है जो हाल के समय में दूसरे दलों से भाजपा में आए थे। अब ‘टीम योगी’ पूरी तरह से नए कलेवर में 2027 की चुनौतियों के लिए तैयार नजर आ रही है।