Knews Desk– ड्रग मामलों को लेकर अक्सर पंजाब को केंद्र में रखकर चर्चा होती रही है, लेकिन नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के ताज़ा आंकड़े एक अलग तस्वीर पेश करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, देश में दर्ज एनडीपीएस (NDPS Act) मामलों में केरल पहले स्थान पर है, जबकि महाराष्ट्र दूसरे और पंजाब तीसरे स्थान पर आता है। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु भी टॉप पांच राज्यों में शामिल हैं।
एनसीआरबी के 2022 के आंकड़ों के मुताबिक देशभर में कुल 1.15 लाख से अधिक ड्रग केस दर्ज किए गए। इनमें केरल में 26,619 मामले, महाराष्ट्र में 13,830, पंजाब में 12,442 उत्तर प्रदेश में 11,541 और तमिलनाडु में 10,385 मामले दर्ज हुए। इसके बाद राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों का स्थान आता है।

रिपोर्ट के अनुसार, कुल मामलों में अकेले केरल की हिस्सेदारी लगभग 23 प्रतिशत, महाराष्ट्र की 12 प्रतिशत, पंजाब की 11 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश की 10 प्रतिशत और तमिलनाडु की 9 प्रतिशत रही। ये पांच राज्य मिलकर देश के अधिकांश ड्रग मामलों का बड़ा हिस्सा बनाते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इन आंकड़ों को सीधे तौर पर राज्यों की वास्तविक स्थिति का पैमाना नहीं माना जा सकता। NCRB खुद भी स्पष्ट करता है कि यह डेटा केवल पुलिस में दर्ज मामलों पर आधारित होता है, न कि पूरे देश में फैले नशे के वास्तविक स्तर का पूर्ण चित्र।
पंजाब की छवि और वास्तविक आंकड़ों का अंतर
पंजाब को लंबे समय से नशे के मुद्दे पर बदनाम राज्य के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि स्थिति इतनी एकतरफा नहीं है। वर्ष 2022 में पंजाब में 12,442 NDPS केस दर्ज हुए, जो कई अन्य राज्यों से कम हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी राज्य में अधिक या कम केस दर्ज होना पुलिस की सक्रियता, जांच प्रणाली और अभियान पर भी निर्भर करता है। इसलिए अधिक एफआईआर दर्ज होने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि वहां अपराध भी अधिक हैं।
ड्रग मामलों में बढ़ोतरी
एनसीआरबी के अनुसार, 2021 की तुलना में 2022 में ड्रग मामलों में करीब 47 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह वृद्धि केवल अपराध बढ़ने की वजह से नहीं, बल्कि पुलिस की सख्त कार्रवाई और रिपोर्टिंग में सुधार के कारण भी हो सकती है 2021 में जहां देशभर में 78,331 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2022 में यह संख्या बढ़कर 1.15 लाख से अधिक हो गई।
व्यक्तिगत सेवन और तस्करी के मामले
रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि ड्रग मामलों में सबसे बड़ा हिस्सा व्यक्तिगत उपयोग या कब्जे से जुड़े मामलों का है। 2022 में लगभग 77,172 केस ऐसे थे जो व्यक्तिगत सेवन से जुड़े थे, जबकि 38,000 से अधिक मामले ड्रग तस्करी के थे। यह दर्शाता है कि समस्या केवल सप्लाई चेन तक सीमित नहीं है, बल्कि मांग (demand) भी तेजी से बढ़ रही है। 2021 की तुलना में व्यक्तिगत सेवन के मामलों में लगभग 68 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
गिरफ्तारी और जब्ती
साल 2022 में एनडीपीएस मामलों के तहत 1.44 लाख से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 34 प्रतिशत अधिक है। नशीले पदार्थों की जब्ती भी बड़ी मात्रा में हुई, जिसमें गांजा सबसे अधिक जब्त किया गया। इसके अलावा हेरोइन, पोस्ता छिलका और मार्फीन जैसी मादक वस्तुओं की भी भारी मात्रा में बरामदगी दर्ज की गई।
एनसीआरबी रिपोर्ट साफ तौर पर बताती है कि ड्रग समस्या पूरे देश में फैली हुई है और यह केवल कुछ राज्यों तक सीमित नहीं है। हालांकि, राज्यों की तुलना करते समय सावधानी बरतनी जरूरी है, क्योंकि हर राज्य की पुलिसिंग, रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया और स्थानीय परिस्थितियाँ अलग-अलग होती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक केस दर्ज होना हमेशा अधिक अपराध का संकेत नहीं होता, बल्कि कई बार यह बेहतर निगरानी और सख्त कार्रवाई का परिणाम भी हो सकता है।
रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भारत में नशे की समस्या लगातार बढ़ रही है और यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी बन चुकी है।