Knews Desk– मदर्स डे सिर्फ मां के प्यार, त्याग और समर्पण का उत्सव नहीं है, बल्कि उन महिलाओं को सलाम करने का भी दिन है जिन्होंने परिवार और जिम्मेदारियों के साथ अपने सपनों को भी जिया। आज के दौर में महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं और कई ऐसी प्रेरणादायक कहानियां सामने आई हैं, जिन्होंने यह साबित किया कि मां बनने के बाद जिंदगी रुकती नहीं, बल्कि और मजबूत हो जाती है।
आज हम आपको पांच ऐसी महिलाओं की सफलता की कहानी बता रहे हैं, जिन्होंने मां बनने के बाद देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की और आईएएस-आईपीएस अधिकारी बनकर लाखों महिलाओं के लिए मिसाल कायम की।
डॉ. अनुपमा सिंह : बेटे से दूर रहकर की तैयारी

बिहार के पटना की रहने वाली डॉ. अनुपमा सिंह की कहानी संघर्ष और समर्पण का बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने मां बनने के बाद यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू की। अपने बेटे अनय से दूर रहकर उन्होंने कड़ी मेहनत की और पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर आईएएस अधिकारी बनीं।
डॉ. अनुपमा ने पटना मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ सर्जरी की पढ़ाई की थी। शादी और मां बनने के बाद भी उन्होंने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा और सिविल सेवा में सफलता प्राप्त की।
मालविका जी नायर : बेटे के जन्म के 17 दिन बाद दी UPSC परीक्षा

केरल के तिरुवल्ला की रहने वाली मालविका जी नायर ने यह साबित किया कि इच्छाशक्ति मजबूत हो तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। उन्होंने बेटे को जन्म देने के महज 17 दिन बाद यूपीएससी मेंस परीक्षा दी।
मालविका ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2024 में 45वीं रैंक हासिल की। वह पहले से ही 2020 बैच की IRS अधिकारी थीं, लेकिन उन्होंने आगे बढ़ते हुए आईएएस बनने का सपना पूरा किया। उनकी कहानी आज लाखों कामकाजी महिलाओं और नई माताओं को प्रेरित कर रही है।
शहनाज इलियास : प्रेग्नेंसी के दौरान की तैयारी

तमिलनाडु की रहने वाली शहनाज इलियास ने प्रेग्नेंसी के दौरान यूपीएससी परीक्षा की तैयारी की और साल 2020 में 217वीं रैंक हासिल कर आईपीएस अधिकारी बनीं।
आईपीएस बनने से पहले वह करीब पांच साल तक एक आईटी कंपनी में काम कर चुकी थीं। हालांकि समाज में बदलाव लाने की इच्छा ने उन्हें सिविल सेवा की ओर आकर्षित किया। उन्होंने नौकरी छोड़कर पूरी मेहनत से तैयारी की और पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की।
पुष्पलता यादव : घर और पढ़ाई दोनों को संभाला

हरियाणा के रेवाड़ी जिले की रहने वाली पुष्पलता यादव ने घर की जिम्मेदारियों के साथ यूपीएससी की तैयारी की। जब उन्होंने तैयारी शुरू की, तब उनका बेटा सिर्फ दो साल का था।
उनके डॉक्टर पति ने हर कदम पर उनका साथ दिया। लगातार मेहनत और परिवार के सहयोग से उन्होंने साल 2017 में यूपीएससी परीक्षा में 80वीं रैंक हासिल की और आईएएस अधिकारी बनीं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि सही समर्थन और आत्मविश्वास से हर मुश्किल आसान हो सकती है।
मातृत्व और सपनों की मिसाल
इन पांच महिलाओं की कहानियां यह साबित करती हैं कि मां बनने के बाद भी महिलाएं अपने सपनों को पूरा कर सकती हैं। मातृत्व जिम्मेदारियां जरूर बढ़ाता है, लेकिन अगर आत्मविश्वास, मेहनत और परिवार का सहयोग हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। मदर्स डे पर ये महिलाएं हर मां के लिए प्रेरणा हैं, जो अपने परिवार के साथ-साथ अपने सपनों को भी जीना चाहती हैं।