Knews Desk-आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए सात राज्यसभा सांसद 5 मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे। यह बैठक सुबह 10:40 बजे निर्धारित की गई है। सांसदों का कहना है कि वे पंजाब सरकार द्वारा कथित राजनीतिक बदले की कार्रवाई को लेकर अपनी शिकायत राष्ट्रपति के समक्ष रखेंगे।
हाल ही में राजनीतिक घटनाक्रम में बड़ा बदलाव देखने को मिला था, जब AAP के सात राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। इन सांसदों में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, अशोक कुमार मित्तल, विक्रमजीत सिंह साहनी और राजेंद्र गुप्ता शामिल हैं। राज्यसभा के सभापति ने उनके भाजपा में विलय के प्रस्ताव को मंजूरी भी दे दी थी, जिससे यह राजनीतिक बदलाव औपचारिक रूप से स्वीकार हो गया।

इन सांसदों ने दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों का उपयोग करते हुए अपनी सदस्यता बनाए रखी है। संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार, यदि किसी दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्य किसी अन्य दल में विलय के लिए सहमत होते हैं, तो उन्हें अयोग्यता से सुरक्षा मिलती है। इसी आधार पर इन सांसदों ने अपनी स्थिति बरकरार रखी। हालांकि, इस प्रावधान को लेकर लगातार विवाद भी बना हुआ है। आलोचकों का कहना है कि यह व्यवस्था राजनीतिक दल-बदल को बढ़ावा देती है और लोकतांत्रिक जवाबदेही पर सवाल खड़े करती है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी उसी दिन राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे। वे सांसदों के विलय और इस पूरी प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाने की बात कर रहे हैं। इससे पंजाब की राजनीति में तनाव और बढ़ने की संभावना है। दूसरी ओर, AAP की ओर से भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि इस विलय प्रक्रिया में नियमों का पालन सही तरीके से नहीं किया गया। पार्टी ने दस्तावेजों की सत्यता और प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं और मामले में उच्च स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की है।
अब यह मामला केवल राजनीतिक नहीं बल्कि संवैधानिक बहस का भी रूप ले चुका है। एक तरफ सांसद अपने फैसले को सही ठहरा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विरोधी दल इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बता रहे हैं। 5 मई की राष्ट्रपति से होने वाली बैठक को इस पूरे विवाद में बेहद अहम माना जा रहा है।