Knews Desk-नई दिल्ली में एक 14 वर्षीय बच्चे को नई जिंदगी मिली है, जो एक दिल को छू लेने वाले अंगदान के कारण संभव हुआ। यह मानवीय निर्णय एक भारतीय सेना अधिकारी के परिवार ने अपने गहरे दुख के बीच लिया, जिसने न केवल एक बच्चे की जान बचाई बल्कि कई अन्य जरूरतमंद मरीजों के लिए भी उम्मीद की किरण जगाई।

जानकारी के अनुसार, हरियाणा के पंचकूला स्थित कमांड अस्पताल, चंडीमंदिर में 41 वर्षीय महिला को गंभीर ब्रेन हेमरेज के बाद भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और 2 मई को उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। इस कठिन समय में उनके पति, जो भारतीय सेना में अधिकारी हैं, और उनकी दो बेटियों ने साहसिक फैसला लेते हुए अंगदान की सहमति दी। महिला का हृदय नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में भर्ती 14 वर्षीय बच्चे के लिए जीवनदान साबित हुआ। यह बच्चा पिछले एक साल से एंड-स्टेज हार्ट फेल्योर से जूझ रहा था और उसकी हालत लगातार बिगड़ रही थी। डॉक्टरों के अनुसार, उसके लिए हृदय प्रत्यारोपण ही एकमात्र विकल्प था।
जैसे ही अंग उपलब्ध हुआ, अपोलो अस्पताल की विशेषज्ञ टीम तुरंत चंडीगढ़ रवाना हुई। इसके लिए चार्टर्ड विमान की व्यवस्था की गई ताकि समय की बचत हो सके। चंडीगढ़ से लेकर दिल्ली तक सभी संबंधित एजेंसियों ने मिलकर तेजी से समन्वय किया। ट्रैफिक पुलिस ने एयरपोर्ट से अस्पताल तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया, जिससे एंबुलेंस मात्र 20 मिनट में अस्पताल पहुंच सकी। इस पूरी प्रक्रिया में चंडीगढ़, हरियाणा और पंजाब पुलिस का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा। इसके बाद सफलतापूर्वक हृदय प्रत्यारोपण किया गया।
फिलहाल बच्चा आईसीयू में डॉक्टरों की निगरानी में स्थिर है। अस्पताल प्रशासन ने इस पूरी प्रक्रिया में कमांड अस्पताल और सभी सहयोगी टीमों के प्रयासों की सराहना की है। डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे का नाम दो महीने पहले राष्ट्रीय अंग एवं टिश्यू ट्रांसप्लांट संगठन की सूची में दर्ज किया गया था और समय पर मिला यह अंग उसके लिए जीवनदायिनी साबित हुआ। यह घटना अंगदान की महत्ता और मानवीय संवेदनाओं का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।