शिव शंकर सविता- उत्तर प्रदेश के कानपुर में स्वास्थ्य विभाग और खाद्य औषधि प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए शहर के पांच प्रमुख ब्लड बैंकों के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। इसमें प्रतिष्ठित आईएमए ब्लड बैंक भी शामिल है। यह कठोर कदम ब्लड बैंकों में गंभीर अनियमितताएं, रखरखाव में लापरवाही और अनिवार्य जांचों की अनदेखी पाए जाने के बाद उठाया गया है। इस कार्रवाई से शहर के अन्य चिकित्सा केंद्रों में हड़कंप मच गया है।
एलाइजा टेस्ट की अनदेखी: मरीजों की जान से खिलवाड़
खाद्य औषधि प्रशासन आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के निर्देश पर मार्च के अंतिम सप्ताह में प्रदेश व्यापी विशेष अभियान चलाया गया था। जांच टीम ने जब कानपुर के इन केंद्रों का औचक निरीक्षण किया, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। आईएमए को छोड़कर बाकी चार ब्लड बैंकों में संक्रमण की पहचान के लिए अनिवार्य ‘एलाइजा टेस्ट’ तक नहीं किया जा रहा था। हैरानी की बात यह है कि गंभीर रोगियों को केवल ‘रैपिड टेस्ट’ के भरोसे ही खून दिया जा रहा था। विशेषज्ञों के अनुसार, रैपिड टेस्ट पूरी तरह सटीक नहीं होता, जिससे एचआईवी, हेपेटाइटिस और अन्य घातक संक्रमण फैलने का बड़ा खतरा बना रहता है। इसके अलावा, खाली ब्लड बैग्स की गुणवत्ता की कोई रिपोर्ट मौके पर नहीं मिली।
इन 5 ब्लड बैंकों पर गिरी गाज
प्रशासन ने सुधार होने और संतोषजनक रिपोर्ट प्रस्तुत करने तक निम्नलिखित ब्लड बैंकों के कामकाज पर रोक लगा दी है-
- आईएमए (IMA) ब्लड बैंक, परेड
- स्वास्तिक ब्लड बैंक, इंद्रानगर
- मायांजलि चैरिटेबल ब्लड बैंक, सिविल लाइंस
- पुष्पांजलि चैरिटेबल ब्लड एंड कंपोनेंट सेंटर, नौबस्ता
- वाडा चैरिटेबल ब्लड बैंक, कल्याणपुर
गंदगी और रिकॉर्ड में हेराफेरी: न डॉक्टर मिले न स्टाफ
ड्रग इंस्पेक्टर ओमपाल ने बताया कि जांच के दौरान इन केंद्रों पर भारी गंदगी पसरी मिली। नियमानुसार ब्लड बैंक में हमेशा प्रशिक्षित डॉक्टर और टेक्निकल स्टाफ का होना अनिवार्य है, लेकिन निरीक्षण के समय वहां कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं मिला। खून के रखरखाव के लिए निर्धारित तापमान का पालन नहीं किया जा रहा था, जिससे रक्त की गुणवत्ता खराब होने का डर था। सबसे गंभीर बात यह रही कि इन केंद्रों के पास इस बात का कोई पुख्ता लेखा-जोखा नहीं था कि खून किससे लिया गया और किसे दिया गया। आईएमए ब्लड बैंक में भी रखरखाव और जांच संबंधी दस्तावेजों में भारी विसंगतियां पाई गईं।
रक्त संग्रहण और वितरण पर तत्काल रोक
निलंबन की अवधि के दौरान ये ब्लड बैंक न तो रक्तदान शिविर लगा सकेंगे और न ही किसी अस्पताल या मरीज को रक्त की आपूर्ति कर सकेंगे। ड्रग विभाग ने स्पष्ट किया है कि इनके पास मौजूद स्टॉक की जांच की जाएगी। यदि रक्त की एक्सपायरी डेट पास होगी, तो उसे तत्काल उर्सला या मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरित कर दिया जाएगा ताकि जरूरतमंदों के काम आ सके। प्रशासन की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले संस्थानों को बख्शा नहीं जाएगा। अब इन ब्लड बैंकों को अपनी खामियां दूर कर दोबारा निरीक्षण कराना होगा, तभी उनका लाइसेंस बहाल हो पाएगा।